Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 4 min read
ध्यान दें। नगर निगमों/निकायों की संख्या और सीमाएँ राज्य सरकार की अधिसूचनाओं से बदलती रहती हैं (जैसे जयपुर, जोधपुर, कोटा के निगमों का पुनर्गठन)। यहाँ संरचना और सिद्धांत पर जोर है; नवीनतम संख्या सरकारी स्रोत से देखें।
नगरीय स्थानीय शासन — अवधारणा
नगरीय स्थानीय स्वशासन — शहरों/कस्बों का शासन-प्रबंध निर्वाचित स्थानीय निकायों द्वारा, जो पेयजल, सफाई, सड़क, प्रकाश, कचरा प्रबंधन, भवन-निर्माण नियमन, जन्म-मृत्यु पंजीकरण आदि सेवाएँ देते हैं।
- संवैधानिक आधार: 74वाँ संविधान संशोधन, 1992 (भाग IX-A, अनुच्छेद 243P–243ZG; 12वीं अनुसूची में 18 विषय) — अलग नोट में विस्तार।
- विषय: राज्य सूची की प्रविष्टि 5 (स्थानीय शासन)।
- नियंत्रक विभाग: स्वायत्त शासन विभाग / स्थानीय निकाय विभाग (Department of Local Bodies), राजस्थान — मुख्यालय जयपुर।
राजस्थान में नगर निकायों के प्रकार
राजस्थान में तीन प्रकार के नगर निकाय हैं (राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 के अनुसार):
| निकाय | जनसंख्या मानदंड (प्रचलित) | निर्वाचित प्रमुख |
|---|---|---|
| नगर निगम (Municipal Corporation) | लगभग 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले बड़े नगर | महापौर (मेयर) |
| नगर परिषद (Municipal Council) | लगभग 1 लाख से 5 लाख | सभापति |
| नगर पालिका (Municipal Board) | लगभग 1 लाख से कम; छोटे कस्बे (विभिन्न श्रेणियाँ) | अध्यक्ष |
(जनसंख्या-सीमाओं में समय-समय पर परिवर्तन होते हैं; सिद्धांत यही है कि जितना बड़ा शहर, उतना बड़ा निकाय।)
नगर निगम
- राजस्थान के बड़े शहर — जयपुर, जोधपुर, कोटा पहले नगर निगम बने; बाद में अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, भरतपुर, अलवर, भीलवाड़ा आदि में भी निगम बने।
- जयपुर, जोधपुर और कोटा के निगमों का दो-दो भागों में विभाजन (2019–20) और बाद में पुनः एकीकरण की घोषणाएँ — नवीनतम स्थिति देखें।
- महापौर — निर्वाचित (प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष चुनाव का स्वरूप समय-समय पर बदला है)।
- संरचना: पार्षद (वार्ड सदस्य), महापौर, उप-महापौर, आयुक्त (प्रशासनिक प्रमुख; IAS/RAS)।
- समितियाँ: स्थायी समितियाँ (वित्त, स्वास्थ्य, निर्माण आदि)।
नगर परिषद / नगर पालिका
- सभापति/अध्यक्ष नगर परिषद/पालिका का निर्वाचित प्रमुख; उपसभापति/उपाध्यक्ष।
- अधिशासी अधिकारी (EO) — प्रशासनिक प्रमुख (राज्य सेवा अधिकारी)।