Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read
ध्यान दें। इस नोट के संवैधानिक अनुच्छेद और संख्याएँ स्थायी हैं और परीक्षा में प्रायः सीधे पूछी जाती हैं।
पृष्ठभूमि
- स्वतंत्रता के बाद नगरीय स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा नहीं था; वे राज्य सरकारों की मर्जी पर निर्भर रहे — कई बार चुनाव टलते और निकाय भंग होते रहे।
- प्रमुख समितियाँ और प्रयास: बलवंत राय मेहता समिति (1957) (ग्रामीण); अशोक मेहता समिति (1977); राजीव गांधी सरकार के प्रयास (64वाँ संशोधन विधेयक 1989, राज्यसभा में गिरा); नरसिम्हा राव सरकार के समय 73वाँ और 74वाँ संशोधन (1992)।
- उद्देश्य: शहरी निकायों को संवैधानिक दर्जा, नियमित चुनाव, आरक्षण, वित्तीय आधार, शक्तियों का हस्तांतरण।
मुख्य तथ्य
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अधिनियम | संविधान (74वाँ संशोधन) अधिनियम, 1992 |
| लागू | 1 जून 1993 |
| नया भाग | भाग IX-A (नगरपालिकाएँ) |
| अनुच्छेद | 243P से 243ZG (कुल 18 अनुच्छेद) |
| नई अनुसूची | 12वीं अनुसूची — नगरपालिकाओं के 18 विषय |
| संबंधित | 73वाँ संशोधन (1992; लागू 24 अप्रैल 1993) — पंचायतें, 11वीं अनुसूची (29 विषय) |
प्रमुख प्रावधान
1. नगरपालिकाओं का गठन (अनुच्छेद 243Q)
तीन प्रकार की नगरपालिकाएँ:
| निकाय | क्षेत्र |
|---|---|
| नगर पंचायत | ग्रामीण से शहरी में संक्रमणशील क्षेत्र |
| नगर परिषद (नगरपालिका परिषद) | छोटे शहरी क्षेत्र |
| नगर निगम | बड़े शहरी क्षेत्र |
(राज्य सरकार जनसंख्या, घनत्व, राजस्व, गैर-कृषि रोजगार आदि के आधार पर निर्णय करती है।)
2. संरचना और निर्वाचन (243R)
- सभी सीटें प्रत्यक्ष निर्वाचन से भरी जाएँगी (वार्ड से)।
- राज्य विधानमंडल चाहे तो प्रतिनिधित्व दे सकता है — नगरपालिका प्रशासन में अनुभव वाले व्यक्ति (बिना मताधिकार), लोकसभा/विधानसभा/राज्यसभा/परिषद के सदस्य (क्षेत्र में)।
- अध्यक्ष (महापौर/सभापति) का चुनाव राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित तरीके से।
3. वार्ड समितियाँ (243S)
- 3 लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाली नगरपालिकाओं में वार्ड समितियाँ — एक या अधिक वार्डों को मिलाकर; जनभागीदारी के लिए।
4. आरक्षण (243T)
- SC और ST — जनसंख्या के अनुपात में।
- महिलाएँ — कुल सीटों का कम से कम 1/3 (SC/ST की सीटों में भी महिलाओं का 1/3)।
- अध्यक्ष पद भी राज्य विधानमंडल द्वारा तय पद्धति से आरक्षित।
- पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण राज्य विधानमंडल की इच्छा पर।
5. कार्यकाल (243U)
- 5 वर्ष।
- विघटन होने पर 6 माह के भीतर चुनाव; शेष अवधि के लिए नए निकाय का कार्यकाल (यदि शेष अवधि 6 माह से कम हो, चुनाव आवश्यक नहीं)।
6. शक्तियाँ और उत्तरदायित्व (243W)
- 12वीं अनुसूची के 18 विषय — राज्य विधानमंडल निकायों को ऐसी शक्तियाँ और प्राधिकार दे सकता है जिनसे वे स्वशासन की संस्था के रूप में कार्य कर सकें।
12वीं अनुसूची के विषय (सार)
- नगर नियोजन (शहरी योजना सहित)।
- भूमि उपयोग और भवन निर्माण का विनियमन।
- आर्थिक और सामाजिक विकास की योजना।
- सड़कें और पुल।
- घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए जल आपूर्ति।
- जन स्वास्थ्य, स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन।
- अग्निशमन सेवाएँ।
- नगरीय वानिकी, पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिकी।
- समाज के कमजोर वर्गों (विकलांग, मानसिक रूप से अस्वस्थ) के हितों की रक्षा।
- झुग्गी सुधार और उन्नयन।
- नगरीय गरीबी उन्मूलन।
- उद्यान, खेल के मैदान जैसी नगरीय सुविधाएँ।
- सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सौंदर्यपरक पहलुओं को बढ़ावा।
- शवदाह, कब्रिस्तान, विद्युत शवदाह।
- पशु तालाब, पशु क्रूरता निवारण।
- जन्म-मृत्यु पंजीकरण।
- सार्वजनिक सुविधाएँ — सड़क प्रकाश, पार्किंग, बस स्टॉप, सार्वजनिक शौचालय।
- वधशालाओं और चर्मशोधन (टैनरी) का विनियमन।
7. वित्त (243X–243Y)
- कर, शुल्क, अनुदान लगाने-वसूलने की शक्ति राज्य कानून से।
- राज्य वित्त आयोग (243Y) — हर 5 वर्ष में गठित; राज्य और निकायों के बीच राजस्व का वितरण की सिफारिश।
- केंद्रीय वित्त आयोग राज्य के संचित कोष को बढ़ाने के उपाय सुझाता है।
8. चुनाव और लेखा (243ZA, 243Z)
- राज्य निर्वाचन आयोग (243K और 243ZA) — चुनाव का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण।
- निकायों के खातों का अंकेक्षण — राज्य के विधान द्वारा।
9. योजना समितियाँ
- जिला योजना समिति (243ZD) — पंचायतों और नगरपालिकाओं की योजनाओं का एकीकरण।
- महानगर योजना समिति (243ZE) — 10 लाख से अधिक आबादी वाले महानगर क्षेत्र में।
10. अन्य
- संघ राज्य क्षेत्रों में लागू (243ZB)।
- अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्रों पर लागू नहीं (243ZC)।
- निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालयों का हस्तक्षेप निषिद्ध (243ZG)।
- भाग IX-A के क्षेत्रों पर संसद का विशेष कानून अलग।