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राज्य मानवाधिकार आयोग

मानवाधिकार की अवधारणा, संरक्षण का अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय ढाँचा; मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (संशोधन 2006 और 2019) के अनुसार राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोगों का गठन, अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति-योग्यता-कार्यकाल, कार्य और शक्तियाँ; राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग (जयपुर); मानवाधिकार न्यायालय; सीमाएँ और परीक्षा-उपयोगी तथ्य।

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Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read

ध्यान दें। आयोग के सदस्यों की संख्या और अध्यक्ष की योग्यता 2019 के संशोधन के बाद बदली है। यहाँ अधिनियम के प्रमुख प्रावधान दिए गए हैं; राजस्थान आयोग के वर्तमान पदाधिकारी सरकारी स्रोत से देखें।

मानवाधिकार — अवधारणा

मानवाधिकार — वे मौलिक अधिकार जो मनुष्य होने के नाते सभी को प्राप्त हैं (जीवन, स्वतंत्रता, समानता, गरिमा)।

  • संयुक्त राष्ट्र सार्वभौम मानवाधिकार घोषणा (UDHR) — 10 दिसंबर 1948; इसी कारण 10 दिसंबर को विश्व मानवाधिकार दिवस।
  • भारत में: संविधान के भाग III (मौलिक अधिकार) और भाग IV (नीति निदेशक तत्व) मानवाधिकारों को संरक्षण देते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदाएँ: नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर (ICCPR, 1966) और आर्थिक-सामाजिक-सांस्कृतिक अधिकारों पर (ICESCR, 1966)।

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993

  • पृष्ठभूमि: 28 सितंबर 1993 को अध्यादेश के रूप में आया; अधिनियम के रूप में 8 जनवरी 1994 से प्रभावी माना जाता है (दोनों तिथियाँ स्रोतों में मिलती हैं)।
  • उद्देश्य: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) और मानवाधिकार न्यायालयों की स्थापना।
  • संशोधन: 2006 और 2019।
  • परिभाषा: "मानवाधिकार" — संविधान द्वारा प्रदत्त या अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदाओं में सन्निहित और भारतीय न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा से संबंधित अधिकार।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) — संक्षेप

  • स्थापना — 12 अक्तूबर 1993; मुख्यालय नई दिल्ली।
  • अध्यक्ष: सर्वोच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश (2019 संशोधन से न्यायाधीश भी)।
  • सदस्य: न्यायिक पृष्ठभूमि के सदस्य तथा मानवाधिकार का ज्ञान/अनुभव रखने वाले सदस्य; 2019 के संशोधन से संरचना में परिवर्तन हुए (महिला सदस्य की अनिवार्यता सहित)।

राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC)

गठन

  • अधिनियम की धारा 21 — राज्य सरकार SHRC का गठन करती है।
  • राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषयों (संघ सूची के विषयों को छोड़कर) पर उल्लंघनों की जाँच।

अध्यक्ष और सदस्य

बिंदु प्रावधान (2019 संशोधन के बाद)
अध्यक्ष उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश
सदस्य उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त या कार्यरत न्यायाधीश, जिला न्यायाधीश (कम से कम 7 वर्ष अनुभव), और मानवाधिकार का ज्ञान/व्यावहारिक अनुभव रखने वाला व्यक्ति (कुल 3 सदस्य)
नियुक्ति राज्यपाल द्वारा, एक चयन समिति की सिफारिश पर
चयन समिति मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), विधानसभा अध्यक्ष, राज्य के गृह मंत्री, विधानसभा में विपक्ष का नेता (विधान परिषद वाले राज्य में परिषद के सभापति व नेता प्रतिपक्ष भी)
कार्यकाल 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (जो पहले हो) (2019 संशोधन से पहले 5 वर्ष/70)
पुनर्नियुक्ति अध्यक्ष और सदस्य पुनः नियुक्त हो सकते हैं (2019 संशोधन)
हटाना राष्ट्रपति के आदेश से, सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बाद दुर्व्यवहार या अक्षमता पर; या दिवालिया होने, सवेतन पद लेने आदि पर

कार्य

  1. मानवाधिकार उल्लंघन या उसके दुष्प्रेरण की शिकायतों की जाँच (स्वतः या शिकायत पर)।
  2. लोक सेवक की लापरवाही की जाँच।
  3. कारागारों, बाल गृहों, बंदी-गृहों का निरीक्षण।
  4. न्यायालय में लंबित मानवाधिकार मामलों में हस्तक्षेप (न्यायालय की अनुमति से)।
  5. मानवाधिकार साक्षरता और जागरूकता फैलाना; शोध।
  6. संविधान और कानूनों की समीक्षा और सुधार की सिफारिश।

शक्तियाँ

  • दीवानी न्यायालय की शक्तियाँ — समन जारी करना, दस्तावेज माँगना, गवाह बुलाना।
  • जाँच के लिए राज्य या केंद्र सरकार के अधिकारी की सेवाएँ लेना।
  • सिफारिश करना — मुआवजा, अभियोजन, अंतरिम राहत।
  • सिफारिशें बाध्यकारी नहीं — राज्य सरकार को एक माह में प्रतिक्रिया देनी होती है।
  • वार्षिक रिपोर्ट — राज्यपाल को; राज्यपाल इसे विधानसभा में रखवाता है।

सीमाएँ

  • एक वर्ष से पुरानी घटना की शिकायत सामान्यतः नहीं सुनी जाती।
  • अनामिक/ अस्पष्ट, न्यायालयाधीन या सशस्त्र बलों (कुछ मामलों में NHRC की रिपोर्ट) के मामलों में सीमाएँ।
  • सिफारिशी (प्रभावी) शक्ति — दंड देने की शक्ति नहीं।

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