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कृषक एवं जनजाति आंदोलन, प्रजामंडल आंदोलन

राजस्थान के किसान आंदोलन (बिजौलिया, बेगूं, बरड़ बूंदी, अलवर-भरतपुर, नीमूचणा, शेखावाटी, मारवाड़), जनजाति आंदोलन (गोविंद गिरी और मानगढ़, मोतीलाल तेजावत और एकी आंदोलन, मीणा आंदोलन), राजस्थान सेवा संघ, तथा विभिन्न रियासतों के प्रजामंडल/प्रजा परिषद की स्थापना, नेता और प्रमुख घटनाएँ।

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Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 7 min read

ध्यान दें। तिथियाँ और संख्याएँ स्रोतों में थोड़ी भिन्न मिलती हैं; यहाँ परीक्षा में प्रचलित तथ्य दिए गए हैं।

पृष्ठभूमि

रियासतों में जागीरदारों का अत्याचार, लगान की ऊँची दरें, लाग-बाग (अनेक उपकर) और बेगार से किसान त्रस्त थे। साथ ही अंग्रेजों के संरक्षण में राजा निरंकुश थे। इसी असंतोष से किसान, आदिवासी और राजनीतिक (प्रजामंडल) आंदोलन उठे। गांधीजी के प्रभाव और कांग्रेस की गतिविधियों ने इन्हें प्रेरणा दी।

प्रमुख किसान आंदोलन

बिजौलिया किसान आंदोलन (मेवाड़)

विवरण तथ्य
स्थान बिजौलिया (भीलवाड़ा), मेवाड़ की जागीर
आरंभ 1897 (गिरधारीपुरा गाँव; फतेहकरण/ साधु सीताराम दास का मार्गदर्शन)
कारण 84 प्रकार के लाग-बाग, लगान 50 % तक, चँवरी कर (विवाह पर), तलवार बंधाई (नए जागीरदार के उत्तराधिकार पर कर)
नेतृत्व साधु सीताराम दास, विजय सिंह पथिक (1916 से), माणिक्य लाल वर्मा, हरिभाऊ उपाध्याय, रामनारायण चौधरी
विशेषता भारत का पहला संगठित, अहिंसक किसान आंदोलन (लगभग 44 वर्ष, 1897–1941); "ऊपरमाल पंच बोर्ड" (लगभग 1916); "ऊपरमाल" क्षेत्र
समाधान 1922 में समझौता (बिजौलिया समझौता — ए.जी.जी. की मध्यस्थता); 1941 में माणिक्य लाल वर्मा के प्रयास से मेवाड़ सरकार ने माँगें मानीं और आंदोलन समाप्त

पथिक ने "राजस्थान केसरी" और "नवीन राजस्थान" जैसे पत्र चलाए; गणेश शंकर विद्यार्थी के "प्रताप" में बिजौलिया की खबरें छपीं।

बेगूं आंदोलन (चित्तौड़गढ़)

  • 1921 — रामनारायण चौधरी के नेतृत्व में; लाग-बाग व बेगार के विरुद्ध।
  • 13 जुलाई 1923 — गोविंदपुरा गोलीकांड: सेना की गोलीबारी में रूपाजी और कृपाजी (धाकड़ किसान) शहीद।
  • पथिक की गिरफ्तारी (1923) — 5 वर्ष की सजा।

बरड़ (बूंदी) आंदोलन

  • 1921 — नयनूराम शर्मा और पंडित नैनू राम के नेतृत्व में; लाग-बाग के विरुद्ध।
  • 2 अप्रैल 1923 — डाबी हत्याकांड: पुलिस की गोलीबारी में नानक जी भील (झंडा गीत गाते हुए) शहीद हुए। (इसे "बरड़ आंदोलन का चरम" माना जाता है।)

अलवर और भरतपुर के किसान आंदोलन

  • अलवर — 1921 में सूअर पालन (राजा के शौक) से खेतों के नुकसान और लगान के विरुद्ध; नीमूचणा हत्याकांड (14 मई 1925) — बानसूर तहसील के नीमूचणा गाँव में सेना की गोलीबारी में दर्जनों किसान शहीद (संख्या अलग-अलग बताई जाती है); गांधीजी ने इसे "दूसरा जलियाँवाला बाग" कहा; "यंग इंडिया" में लेख लिखा।
  • भरतपुर — लगान और अन्य करों के विरुद्ध किसान-जाट संगठन सक्रिय रहे।

शेखावाटी (सीकर, झुंझुनूँ) किसान आंदोलन

  • सीकर ठिकाना में लगान और बेगार के विरुद्ध; 1931 में राजस्थान जाट क्षेत्रीय महासभा (झुंझुनूँ); 1934 — कटराथल (सीकर) में महिला सम्मेलन — किशोरी देवी (अध्यक्षता), उत्तमा देवी।
  • नेता — सरदार हरलाल सिंह, चौधरी छोटूराम (प्रभाव), नेतराम सिंह, ठाकुर देशराज, रामनारायण चौधरी।
  • 1935 — कूदन गाँव में पुलिस द्वारा गोली, कई किसान मारे गए।
  • 1946–47 में जयपुर राज्य के साथ समझौते।

मारवाड़ (जोधपुर) किसान आंदोलन

  • मारवाड़ किसान सभा (1941) और मारवाड़ हितकारिणी सभा (1923); जयनारायण व्यास।
  • डाबड़ा (नागौर) हत्याकांड — 13 मार्च 1947; मारवाड़ किसान सभा के सम्मेलन पर जागीरदारों के हमले में कई किसान शहीद; मारवाड़ किसान सभा के संस्थापकों में बलदेव राम मिर्धा प्रमुख थे।
  • नागौर के किसानों के लिए "किसान जनपद" शब्द प्रचलित।

अन्य

  • मेवात (अलवर-भरतपुर) में मेव किसानों का आंदोलन; 1932–33।
  • सिरोही और जालौर में लाग-बाग के विरुद्ध।

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