Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 4 min read
ध्यान दें। नहरों की लंबाई, क्षेत्रफल और जल-हिस्से के आँकड़े स्रोतों में भिन्न मिलते हैं। यहाँ परीक्षा में प्रचलित मान्य आँकड़े हैं; नवीनतम स्थिति के लिए जल संसाधन विभाग देखें।
सिंचाई के साधन
| साधन | स्थिति |
|---|---|
| कुएँ और नलकूप (भूजल) | राजस्थान में सिंचाई का सबसे बड़ा साधन (प्रायः लगभग दो-तिहाई सिंचित क्षेत्र) |
| नहरें | दूसरा बड़ा साधन — मुख्यतः श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, कोटा, बूंदी में |
| तालाब | दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान में (सीमित) |
| अन्य | टांका, नाडी, खड़ीन (वर्षा जल संचयन) |
- सिंचित क्षेत्र का अनुपात राज्य के शुद्ध बोए गए क्षेत्र का लगभग एक-तिहाई से कुछ अधिक (वर्षानुसार बदलता है)।
- सर्वाधिक सिंचित जिले: श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ (नहर), जयपुर, अलवर, भरतपुर (कुएँ)।
- सिंचाई विभाग — जल संसाधन विभाग, राजस्थान।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना (पूर्व नाम — राजस्थान नहर)
- राजस्थान की जीवन रेखा; विश्व की सबसे लंबी नहरों में से एक।
- जल स्रोत: हरिके बैराज (पंजाब, सतलुज और ब्यास के संगम पर) — सतलुज-ब्यास का जल।
- शिलान्यास: 31 मार्च 1958 — गोविंद वल्लभ पंत (तत्कालीन गृहमंत्री) द्वारा बीकानेर में।
- नामकरण: राजस्थान नहर से इंदिरा गांधी नहर — 2 नवंबर 1984 को।
- कंवर सेन — इस योजना के प्रारंभिक सुझावक/अभियंता।
- कुल लंबाई: लगभग 649 किमी — फीडर (राजस्थान फीडर) लगभग 204 किमी (पंजाब-हरियाणा-राजस्थान में) + मुख्य नहर लगभग 445 किमी; अंत जैसलमेर (मोहनगढ़ के निकट गोलूवाला)।
- प्रवेश: हनुमानगढ़ जिले के मसीतांवाली हैड से।
चरण
| चरण | विस्तार | विशेषता |
|---|---|---|
| प्रथम चरण | मसीतांवाली (हनुमानगढ़) → पूगल (बीकानेर) — लगभग 189 किमी | 1961 में जल पहुँचा; श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर में सिंचाई |
| द्वितीय चरण | पूगल/मोहनगढ़ → गोलूवाला (जैसलमेर) — लगभग 256 किमी | बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर तक; लिफ्ट नहरें |
प्रमुख लिफ्ट नहरें
मरुस्थल की ऊँची भूमि तक पानी पहुँचाने के लिए लिफ्ट नहरें (पम्पों से):
| लिफ्ट नहर | क्षेत्र |
|---|---|
| कंवर सेन लिफ्ट (लूणकरणसर) | बीकानेर |
| गुरु जम्भेश्वर लिफ्ट (नाचना) | जैसलमेर |
| डॉ. करणी सिंह लिफ्ट (गजनेर) | बीकानेर |
| चौधरी कुंभाराम आर्य लिफ्ट (फलौदी) | जोधपुर |
(लिफ्ट नहरों के क्षेत्र का मिलान पुस्तकों में भिन्न मिलता है; मुख्य नाम याद रखें।)
प्रभाव और चुनौतियाँ
- मरुस्थल में कृषि का विस्तार, पेयजल, हरियाली, गेहूँ-कपास-सरसों-किन्नू।
- चुनौती: सेम (जलभराव), लवणता, नहर का रिसाव, जैव विविधता में परिवर्तन, जल का असमान वितरण।
- नहर की सतह का अस्तरीकरण (लाइनिंग), जल-निकास से सुधार।