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बहुउद्देशीय परियोजनाएँ

राजस्थान की प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ — भाखड़ा-नांगल, चंबल घाटी (गांधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर, कोटा बैराज), माही बजाज सागर, व्यास, जवाई, सोम-कमला-अंबा, जाखम, बीसलपुर और अन्य; इनके स्थान, नदी, साझेदार राज्य, लाभ; साथ में राजस्थान की ऊर्जा परियोजनाएँ (जल, ताप, परमाणु, सौर, पवन) और परीक्षा-उपयोगी तथ्य।

📑 Contents (4 sections)

Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read

ध्यान दें। बाँधों की ऊँचाई/क्षमता और वर्षों के आँकड़े स्रोतों में भिन्न मिलते हैं; यहाँ सर्वाधिक प्रचलित तथ्य हैं। ऊर्जा-क्षमता तेजी से बदलती है — नवीनतम आँकड़े ऊर्जा विभाग/MNRE से देखें।

बहुउद्देशीय परियोजना क्या है?

बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना में एक ही नदी पर बाँध बनाकर सिंचाई, जल-विद्युत, बाढ़ नियंत्रण, पेयजल, मत्स्यपालन, पर्यटन और भू-संरक्षण जैसे अनेक लाभ लिए जाते हैं। जवाहरलाल नेहरू ने बाँधों को "आधुनिक भारत के मंदिर" कहा।

राजस्थान में नदियाँ कम हैं, इसलिए अधिकांश परियोजनाएँ अन्य राज्यों के साथ साझा हैं — पंजाब-हरियाणा (भाखड़ा, व्यास), मध्य प्रदेश (चंबल), गुजरात (माही)।

प्रमुख परियोजनाएँ

1. चंबल घाटी परियोजना

साझेदार: राजस्थान और मध्य प्रदेश (लगभग 50:50)।

चरण बाँध स्थान वर्ष (लगभग)
प्रथम गांधी सागर बाँध मंदसौर (म.प्र.) 1960
द्वितीय राणा प्रताप सागर बाँध रावतभाटा (चित्तौड़गढ़), राजस्थान 1970
तृतीय जवाहर सागर बाँध कोटा-बूंदी 1972
— कोटा बैराज कोटा 1960
  • कोटा बैराज से चंबल नहर (दाईं और बाईं मुख्य नहरें) निकलती हैं — कोटा, बूंदी, बारां में सिंचाई।
  • जल-विद्युत — राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर, गांधी सागर से।
  • राणा प्रताप सागर — चंबल का सबसे बड़ा जलाशय (राजस्थान में); पास रावतभाटा परमाणु बिजलीघर।
  • चंबल पर यह देश की पहली बड़ी मिलीजुली परियोजनाओं में से एक।

2. भाखड़ा-नांगल परियोजना

  • नदी: सतलुज; भाखड़ा बाँध — बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश), नांगल बाँध — पंजाब।
  • साझेदार: पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, (दिल्ली-चंडीगढ़); राजस्थान का अंश — लगभग 15 % (परियोजना शर्तों के अनुसार)।
  • भाखड़ा बाँध — भारत के सबसे ऊँचे ग्रेविटी बाँधों में; जलाशय गोविंद सागर।
  • राजस्थान को लाभ: भाखड़ा नहर (हनुमानगढ़ में सिंचाई), जल-विद्युत।
  • नेहरू ने 1963 में समर्पित किया।

3. ब्यास परियोजना

  • नदी: ब्यास (सतलुज की सहायक); पोंग बाँध (हिमाचल) और पंडोह (मंडी)।
  • साझेदार: राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल।
  • राजस्थान को लाभ: ब्यास का जल इंदिरा गांधी नहर में; हरिके बैराज से नहर।

4. माही बजाज सागर परियोजना

  • नदी: माही; स्थान: बोरखेड़ा (बाँसवाड़ा)।
  • साझेदार: राजस्थान और गुजरात (गुजरात कडाणा बाँध में भाग लेता है); राजस्थान को लगभग 45 % जल।
  • नाम: जमनालाल बजाज (गांधीवादी) के नाम पर।
  • लाभ: बाँसवाड़ा, डूंगरपुर में सिंचाई, जल-विद्युत (माही बजाज सागर विद्युत गृह)।
  • कागदी पिक-अप बाँध (बाँसवाड़ा) से नहरें।
  • बाँसवाड़ा-परमाणु: माही-बाँसवाड़ा परमाणु बिजली परियोजना प्रस्तावित/निर्माणाधीन (नवीनतम स्थिति देखें)।

5. जवाई बाँध

  • नदी: जवाई (लूणी की सहायक); सुमेरपुर (पाली)।
  • निर्माण: जोधपुर महाराजा उम्मेद सिंह के काल में 1946 में प्रारंभ, 1957 के आसपास पूर्ण।
  • पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध; "मारवाड़ का अमृत सरोवर"; पाली, जालौर, जोधपुर को पेयजल/सिंचाई।
  • जवाई बाँध क्षेत्र — तेंदुए और मगर; जवाई लेपर्ड संरक्षण क्षेत्र।

6. बीसलपुर परियोजना

  • नदी: बनास; टोंक।
  • लाभ: जयपुर, अजमेर, टोंक को पेयजल (राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल परियोजनाओं में)।
  • निर्माण: लगभग 1999 में पूर्ण।

7. अन्य प्रमुख परियोजनाएँ

परियोजना नदी/जिला विशेष
सोम-कमला-अंबा सोम, डूंगरपुर सिंचाई
सोम-कागदर उदयपुर सिंचाई
जाखम जाखम, प्रतापगढ़ राजस्थान का सबसे ऊँचा बाँध (प्रचलित तथ्य, ऊँचाई लगभग 81 मी)
मेजा कोठारी, भीलवाड़ा भीलवाड़ा को जल; मेजा बाँध
पार्वती पार्वती, धौलपुर धौलपुर सिंचाई
गम्भीरी गंभीरी, चित्तौड़गढ़ चित्तौड़ के निकट
जयसमंद, राजसमंद उदयपुर/राजसमंद पुरानी झीलें/बाँध
कालीसिंध झालावाड़ सिंचाई + ताप विद्युत
परवन झालावाड़-बारां सिंचाई

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