← राजस्थान का भूगोल

जल संरक्षण

राजस्थान की जल-संकट की स्थिति, पारंपरिक जल संरक्षण संरचनाएँ (टांका, कुंड, बावड़ी, झालरा, नाडी, तालाब, जोहड़, खड़ीन, बेरी, एनीकट, कुंई), आधुनिक योजनाएँ (मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान, अटल भूजल योजना, जल शक्ति अभियान, मनरेगा कार्य, राज्य जल नीति), वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, सामुदायिक प्रयास (तरुण भारत संघ — जोहड़ आंदोलन) और परीक्षा-उपयोगी तथ्य।

📑 Contents (7 sections)

Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read

ध्यान दें। योजनाओं के नाम, बजट और लक्ष्य सरकारों के बदलने पर बदल सकते हैं। यहाँ मूल अवधारणाएँ और प्रचलित योजनाएँ दी गई हैं; नवीनतम स्थिति के लिए राज्य जल संसाधन/पीएचईडी विभाग देखें।

जल की स्थिति

  • राजस्थान देश के क्षेत्रफल का लगभग 10 % है, पर सतही जल संसाधन बहुत कम (देश के जल का लगभग 1 % के आसपास — प्रचलित कथन); वर्षा अल्प और अनिश्चित।
  • भूजल पेयजल और सिंचाई का मुख्य आधार, पर अधिकांश ब्लॉक अतिदोहित/क्रिटिकल (CGWB आकलन) — स्तर लगातार गिर रहा है।
  • इसलिए जल संरक्षण राजस्थान की जीवन-पद्धति का अंग रहा है।

पारंपरिक जल संरक्षण संरचनाएँ

संरचना क्षेत्र विवरण
टांका (कुंड) थार — बीकानेर, चूरू, जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर भूमिगत, पक्का, गोलाकार टैंक; आँगन/छत के वर्षा-जल का संचय; पेयजल; ढँका हुआ; "टांका" — पालर पानी (वर्षा जल) का संग्रह
नाडी जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर गाँव का तालाब (कच्चा, मिट्टी का); वर्षा जल का संग्रह; पशुओं-मनुष्यों के लिए
तालाब / सागर / समंद पूरे राज्य बड़े जलाशय: राजसमंद, जयसमंद, फतेहसागर, बालसमंद आदि
बावड़ी (सीढ़ीदार कुआँ) दौसा (आभानेरी की चाँद बावड़ी), बूंदी (रानी जी की बावड़ी), जयपुर, जोधपुर (तूरजी का झालरा) सीढ़ियों से पानी तक पहुँचना; शीतल; मंदिर-निकट
झालरा जोधपुर (तूरजी का झालरा, महामंदिर) आयताकार सीढ़ीदार जलाशय, नगर के ऊपरी भागों से रिसकर आने वाला जल
खड़ीन जैसलमेर ढालू भूमि पर मिट्टी की बाँध-दीवार — वर्षा का जल रोककर खेत (मिट्टी की नमी में रबी की फसल); पालीवाल ब्राह्मणों की देन (15वीं सदी)
बेरी / बेरियाँ पश्चिमी राजस्थान छोटे कुएँ (कुंई) — रेत की नीचे जिप्सम की परत के ऊपर मीठे जल का संग्रह (कुंई — बहुत संकरे, गहरे, पतले; चूरू, जैसलमेर)
जोहड़ अलवर, भरतपुर, जयपुर छोटे बाँध/तालाब (मिट्टी की पाल से) — भूजल पुनर्भरण
एनीकट पूरे राज्य छोटा बैराज/चेक डैम — नदी का जल रोकना
कुंड मंदिर परिसर छोटा पक्का जलाशय
सर / सागर जयपुर (मानसागर), उदयपुर (पिछोला), बूंदी बड़े झील/तालाब

विशेष तथ्य

  • पालर पानी — वर्षा का सीधा जल (टांके में); रेजाणी पानी — भूमि के भीतर रेत की परत में संचित नमी/जल (कुंई/बेरी में); पाताल पानी — भूजल।
  • खड़ीन का संबंध जैसलमेर के पालीवाल समाज से बताया जाता है।
  • जल देवता और संस्कृति — जल-झूलनी एकादशी, कुआँ पूजा आदि; जल को पवित्र मानने की परंपरा।

This chapter is in the syllabus of

Open an exam to see where this chapter sits in its syllabus, and to practise it.