Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read
ध्यान दें। पशुओं की संख्या हर पशुगणना में बदलती है। नीचे 20वीं पशुगणना (2019) के आधार पर प्रचलित तथ्य हैं; नवीनतम पशुगणना (21वीं) के आँकड़े आने पर बदल सकते हैं।
पशुधन का महत्व
- राजस्थान की अर्थव्यवस्था में कृषि के साथ पशुपालन की बड़ी भूमिका; शुष्क क्षेत्रों में आय का मुख्य स्रोत।
- राज्य दूध, ऊन, माँस, चमड़ा के लिए जाना जाता है।
- ऊन उत्पादन में देश में प्रथम; बकरी, ऊँट, भेड़ की संख्या में शीर्ष स्थान।
- राज्य के दुग्ध उत्पादन में वृद्धि; सरस डेयरी (राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन) की बड़ी भूमिका।
पशुगणना
- पशुगणना प्रति 5 वर्ष में होती है; 20वीं पशुगणना 2019।
- राजस्थान की कुल पशु संख्या लगभग 5.68 करोड़ (2019); देश में दूसरा स्थान (उत्तर प्रदेश के बाद) — प्रचलित तथ्य।
- प्रमुख बातें (प्रचलित): राजस्थान में बकरी सर्वाधिक (लगभग 2 करोड़ से अधिक), फिर गाय, भैंस, भेड़ आदि; ऊँट की संख्या में गिरावट (2012 की तुलना में कमी)।
- सर्वाधिक पशुधन वाला जिला: बाड़मेर (प्रचलित), जैसलमेर आदि।
गाय की नस्लें
| नस्ल | क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|
| थारपारकर | जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर | सर्वोत्तम दुग्ध गुण वाली देशी नस्ल में गिनी जाती; "मालानी" नाम |
| राठी | बीकानेर, श्रीगंगानगर, जैसलमेर, चूरू | "राजस्थान की कामधेनु"; अच्छी दुग्ध देने वाली |
| नागौरी | नागौर, जोधपुर, बीकानेर | बैल दौड़ने और खेती के लिए प्रसिद्ध; नागौर पशु मेला |
| गिर | अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, पाली | मूल गुजरात (गिर); दुग्ध |
| कांकरेज | जालौर, सिरोही, बाड़मेर | द्विकार्यी (दूध और बोझ) |
| मालवी | झालावाड़, कोटा, बारां | कृषि कार्य के बैल |
| सांचौरी | सांचौर (जालौर) | द्विकार्यी |
| हरियाणवी, मेवाती | अलवर, भरतपुर | द्विकार्यी |
अन्य पशु
भैंस
- मुर्रा (हरियाणा से), सुरती; जयपुर, अलवर, भरतपुर आदि में।
- भैंस राज्य के दूध उत्पादन में बड़ा हिस्सा।
भेड़
| नस्ल | क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|
| चोकला (शेखावाटी) | झुंझुनूँ, सीकर, चूरू, बीकानेर | बहुत उत्तम ऊन (मेरिनो-जैसी); "भारतीय मेरिनो" |
| मगरा (बीकानेरी) | बीकानेर, जैसलमेर, चूरू | उत्तम कालीन ऊन; "बीकानेरी चोकला" |
| मारवाड़ी | जोधपुर, पाली, जालौर, बाड़मेर | कालीन/सामान्य ऊन; सर्वाधिक संख्या |
| जैसलमेरी | जैसलमेर | कालीन ऊन |
| पूगल | बीकानेर (पूगल), जैसलमेर | कालीन ऊन |
| नाली | झुंझुनूँ, चूरू, बीकानेर, सीकर | लंबी ऊन |
| सोनाड़ी (चनोथर) | बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर | लंबे कान; ऊन कम |
| मालपुरा | टोंक, जयपुर, भीलवाड़ा | कम गुणवत्ता की ऊन; माँस |
बकरी
| नस्ल | क्षेत्र |
|---|---|
| जखराना | अलवर |
| मारवाड़ी (लोही) | जोधपुर, बाड़मेर, जालौर |
| सिरोही | सिरोही |
| परबतसरी | नागौर (परबतसर) |
राजस्थान बकरियों की संख्या में अग्रणी राज्यों में है।
ऊँट
- ऊँट — राज्य पशु (2014); "रेगिस्तान का जहाज"।
- नस्लें: बीकानेरी (भारी भार उठाने वाली), जैसलमेरी (सवारी, तेज दौड़), मेवाड़ी, मारवाड़ी।
- राष्ट्रीय ऊँट अनुसंधान केंद्र (NRCC) — जोहड़बीड़, बीकानेर (1984)।
- ऊँट संख्या में कमी — चिंता का विषय; राजस्थान ऊँट (वध का प्रतिषेध और अस्थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) अधिनियम, 2015।
- ऊँटनी का दूध — औषधीय गुण; उदयपुर और बीकानेर में डेयरी उत्पाद।
घोड़ा
- मारवाड़ी घोड़ा — मुड़े हुए कान; जोधपुर, पाली; मालानी घोड़ा — बाड़मेर; मारवाड़ी घोड़े सैन्य और खेल के लिए प्रसिद्ध।
गधा, खच्चर, सूअर, मुर्गी
- सूअर: कम; मुर्गीपालन: जयपुर, अजमेर, कोटा आदि के आसपास।