Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read
ध्यान दें। पर्यावरण के आँकड़े (भूजल की स्थिति, प्रदूषण-स्तर) हर साल बदलते हैं। यहाँ मुद्दे, कारण, प्रभावित क्षेत्र और उपाय दिए गए हैं; नवीनतम आँकड़ों के लिए केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और ISFR देखें।
पारिस्थितिकी की पृष्ठभूमि
राजस्थान शुष्क-अर्द्धशुष्क जलवायु वाला राज्य है — कम वर्षा, कम वन, सीमित जल संसाधन और नाजुक पारिस्थितिकी। भारत के भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 10 % होने पर भी राज्य में सतही जल की उपलब्धता अत्यंत कम (देश के जल संसाधनों का बहुत छोटा अंश) है। इसलिए पर्यावरणीय दबाव अधिक है।
प्रमुख मुद्दे
1. जल संकट और भूजल का अति-दोहन
- पेयजल और सिंचाई का बड़ा भाग भूजल पर निर्भर।
- केंद्रीय भूजल बोर्ड के आकलनों में राजस्थान के अनेक ब्लॉक "अतिदोहित" और "क्रिटिकल" श्रेणी में आते हैं (जयपुर, झुंझुनूँ, सीकर, अलवर, नागौर, जोधपुर आदि के क्षेत्र)।
- कारण: ट्यूबवेल से सिंचाई, वर्षा कम, जल-पुनर्भरण कम, उद्योग व शहरीकरण।
- प्रभाव: जल-स्तर में गिरावट, फ्लोराइड, नाइट्रेट और खारापन (जल गुणवत्ता की समस्या), फ्लोरोसिस (दाँत और हड्डियों का रोग) — नागौर, जयपुर, अजमेर, टोंक, जालौर आदि में।
- उपाय: जल संरक्षण (मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान, पारंपरिक टांके/नाडी/खड़ीन), ड्रिप-फव्वारा सिंचाई, वर्षा-जल संचयन, जल उपयोग नियमन।
2. मरुस्थलीकरण
- बालू का विस्तार, उपजाऊ भूमि का रेतीली होना, पवन अपरदन; थार का पूर्व की ओर प्रसार — अगले नोट में विस्तार।
3. मृदा अपरदन, लवणता और जलभराव
- चंबल क्षेत्र में बीहड़ (अवनालिका अपरदन); पवन अपरदन पश्चिम में।
- इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र में सेम (जलभराव) और क्षारीयता — श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर।
- रासायनिक उर्वरकों/कीटनाशकों का अधिक प्रयोग — मृदा प्रदूषण।
4. वन-ह्रास और जैव विविधता
- वन कम (लगभग 5 %), चारे के लिए वनों का दोहन, अतिचारण, अवैध कटाई, आक्रामक प्रजाति — विलायती बबूल (प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा) का प्रसार — देशज वनस्पति पर दबाव।
- संकटग्रस्त प्रजातियाँ — गोडावण, गिद्ध, बाघ (सरिस्का में पूर्व में लुप्तता)।
- जंगली जानवर-मानव संघर्ष; बिजली की लाइनों से पक्षियों की मृत्यु।
5. अरावली में खनन
- अवैध खनन, पहाड़ियों का कटाव, भूजल-पुनर्भरण में कमी, धूल प्रदूषण।
- सर्वोच्च न्यायालय ने समय-समय पर अरावली में खनन पर नियम/प्रतिबंध के निर्देश दिए (नवीनतम आदेश देखें)।
- खनिज — संगमरमर, ग्रेनाइट, पत्थर, तांबा, जस्ता, लौह अयस्क की खदानें।
6. वायु प्रदूषण
- धूल/रेत भरी आँधियाँ (प्राकृतिक), वाहन, ईंट-भट्ठे, खनन, सीमेंट, थर्मल पावर से प्रदूषण।
- जयपुर, जोधपुर, कोटा, अलवर, भिवाड़ी जैसे शहरों/औद्योगिक क्षेत्रों में वायु-गुणवत्ता की चिंता; भिवाड़ी — दिल्ली-एनसीआर के निकट; PM10, PM2.5।
- राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निगरानी।
7. जल प्रदूषण — औद्योगिक अपशिष्ट
- कपड़ा रंगाई-छपाई इकाइयाँ — पाली, बालोतरा (बाड़मेर), जोधपुर, जयपुर (सांगानेर, बगरू); रंगाई के रसायन लूणी, बांडी, जोजड़ी, खारी नदियों में पहुँचते हैं — बांडी नदी, पाली का प्रदूषण चर्चित; उच्च न्यायालय व एनजीटी के आदेश; सामान्य अपशिष्ट शोधन संयंत्र (CETP) स्थापित।
- सांगानेर-बगरू की छपाई इकाइयाँ अमानीशाह नाले और आसपास के जल-स्रोतों के प्रदूषण का कारण बताई जाती रही हैं।
- उदयपुर की झीलों में सीवेज और अतिक्रमण; पिछोला, फतेहसागर की संरक्षण योजनाएँ।
- पुष्कर, आनासागर आदि में जल गुणवत्ता की समस्या।
8. ठोस अपशिष्ट और शहरीकरण
- शहरों में कचरा, प्लास्टिक; निर्माण-मलबा; अस्पताली कचरा।
- स्वच्छ भारत मिशन, जयपुर में वेस्ट-टू-एनर्जी पहल।
9. जलवायु परिवर्तन और सूखा
- अकाल-सूखे की पुनरावृत्ति, तापमान वृद्धि, वर्षा में अनियमितता।
- सौर और पवन ऊर्जा का विस्तार — जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर (भड़ला सौर पार्क) — नवीकरणीय ऊर्जा में राजस्थान अग्रणी; किंतु गोडावण आवासों में बिजली लाइनों का विवाद।