Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read
ध्यान दें। मरुस्थलीकरण से प्रभावित भूमि के प्रतिशत और क्षेत्रफल के आँकड़े अध्ययन और वर्ष के अनुसार बदलते हैं (इसरो का मरुस्थलीकरण एवं भूमि क्षरण एटलस, राष्ट्रीय/राज्य रिपोर्टें)। यहाँ अवधारणा, कारण और उपाय पर जोर है।
मरुस्थलीकरण क्या है?
मरुस्थलीकरण (Desertification) — शुष्क, अर्द्ध-शुष्क और शुष्क उप-आर्द्र क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों जैसे कई कारणों से भूमि का क्षरण (गुणवत्ता में गिरावट), जिससे उपजाऊ भूमि मरुस्थल जैसी बंजर हो जाती है। यह परिभाषा संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम सम्मेलन (UNCCD) पर आधारित है।
ध्यान दें: मरुस्थलीकरण का अर्थ नए रेगिस्तान का बनना नहीं, बल्कि भूमि की जैविक उत्पादकता का घटना है; मौजूदा मरुस्थल का फैलाव उसका एक रूप है।
राजस्थान में स्थिति
- थार मरुस्थल राज्य के लगभग 60 % क्षेत्र में; अरावली के पश्चिम में।
- राजस्थान की बहुत बड़ी भूमि किसी न किसी प्रकार के भूमि क्षरण से प्रभावित मानी जाती है (अनुमान अलग-अलग)।
- पूर्व की ओर प्रसार: अरावली के गैप/दर्रों (जहाँ पहाड़ियाँ कटी हैं या नीची हैं) से रेत पूर्व की ओर बढ़कर जयपुर, अलवर, झुंझुनूँ और हरियाणा-दिल्ली के पश्चिमी भाग तक पहुँचने की आशंका जताई गई है।
- अरावली की भूमिका: अरावली पश्चिमी रेत की आँधियों को पूर्व में आने से रोकने वाली प्राकृतिक दीवार है; खनन व कटाव से यह दीवार कमजोर होती है — इसलिए अरावली संरक्षण मरुस्थलीकरण-रोकथाम का मुख्य अंग।
- चूरू, सीकर, झुंझुनूँ, नागौर में बालू के टीलों का विस्तार।
कारण
प्राकृतिक कारण
| कारण | विवरण |
|---|---|
| शुष्क जलवायु | कम वर्षा, उच्च तापमान, तीव्र वाष्पीकरण |
| तेज हवाएँ | मई-जून की आँधी और पवन अपरदन |
| वर्षा की अनिश्चितता | सूखा, अकाल |
| रेतीली मिट्टी | ढीली, जल कम धारण |
| जलवायु परिवर्तन | तापमान वृद्धि, वर्षा-पैटर्न में बदलाव |
मानवीय कारण
| कारण | विवरण |
|---|---|
| अति-चराई | पशुओं की अधिक संख्या (भेड़, बकरी, ऊँट), चारागाह का ह्रास |
| वनों की कटाई | ईंधन व चारे के लिए वनस्पति हटाना |
| अनुचित कृषि | ढलान/रेतीली भूमि में गहरी जुताई, फसल चक्र का अभाव |
| भूजल का अति-दोहन | जलस्तर घटना; वनस्पति का सूखना |
| सिंचाई से लवणता/सेम | नहर क्षेत्र में ऊसर बनना |
| खनन | अरावली, पत्थर खदानें |
| शहरीकरण, निर्माण, सड़कें | भूमि उपयोग परिवर्तन |
| जनसंख्या दबाव | अधिक दोहन |