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राजस्थान की मृदा

राजस्थान की मिट्टियों के प्रकार (रेतीली, भूरी रेतीली, लाल-पीली, काली, जलोढ़, लवणीय-क्षारीय, पर्वतीय), उनका क्षेत्र, गुण और फसलें; वैज्ञानिक वर्गीकरण (एरिडिसोल्स, एल्फिसोल्स, इन्सेप्टिसोल्स, वर्टिसोल्स, एंटिसोल्स); मृदा अपरदन (वायु, जल, अवनालिका), लवणता व जलभराव, मृदा संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (सूरतगढ़, 2015) और संस्थान।

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Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read

ध्यान दें। मृदा के वर्गीकरण और क्षेत्रों के नाम पुस्तकों में थोड़े भिन्न मिलते हैं। परीक्षा में प्रायः "किस मिट्टी में कौन-सी फसल / कौन-सा जिला" पूछा जाता है।

मृदा — परिभाषा और महत्व

मृदा (मिट्टी) चट्टानों के अपक्षय और जैव पदार्थों के मिश्रण से बनी पृथ्वी की ऊपरी परत है, जो फसलों का आधार है। राजस्थान में जलवायु, चट्टान और वनस्पति की विविधता के कारण अनेक प्रकार की मिट्टियाँ मिलती हैं।

मृदा के प्रमुख प्रकार

मृदा क्षेत्र गुण प्रमुख फसलें
रेतीली (मरुस्थलीय) जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, चूरू, श्रीगंगानगर मोटे कण, जल धारण क्षमता कम, नाइट्रोजन और कार्बनिक पदार्थ कम, चूना (कैल्शियम) अधिक बाजरा, मोठ, मूंग, ग्वार (सिंचाई में गेहूँ, कपास)
भूरी रेतीली (हल्की भूरी) अरावली के पश्चिम (पाली, सिरोही, जालौर, नागौर, सीकर, झुंझुनूँ) रेत + मिट्टी का मिश्रण; मध्यम उर्वर बाजरा, ज्वार, तिलहन; सिंचाई में गेहूँ
लाल-पीली सवाई माधोपुर, सिरोही, भीलवाड़ा, उदयपुर (भाग), डूंगरपुर लोहे के ऑक्साइड; कम उपजाऊ, पर सिंचाई से उपजाऊ मक्का, ज्वार, मूँगफली, कपास
काली मिट्टी (रेगुर) हाड़ौती — कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, उदयपुर-डूंगरपुर का कुछ भाग दक्कन ट्रैप (बेसाल्ट) से बनी; नमी धारण क्षमता सर्वाधिक; चिकनी कपास, सोयाबीन, संतरा, चना, गेहूँ
जलोढ़ (दोमट) भरतपुर, धौलपुर, अलवर, जयपुर, टोंक, सवाई माधोपुर, श्रीगंगानगर (भाग) नदियों द्वारा निक्षेप; सर्वाधिक उपजाऊ गेहूँ, सरसों, चना, जौ, गन्ना, कपास
मिश्रित लाल-काली भीलवाड़ा, उदयपुर, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा दोनों का मिश्रण कपास, मक्का
लवणीय-क्षारीय (ऊसर) बाड़मेर, जालौर, सांभर/डीडवाना क्षेत्र, श्रीगंगानगर नहर क्षेत्र सोडियम/कैल्शियम लवणों की अधिकता, कम उपजाऊ जौ, चुकंदर, खजूर (लवण सहनशील)
पर्वतीय (अरावली) सिरोही, उदयपुर, राजसमंद, अलवर पतली परत, कंकरीली वन, चारागाह

सिंचित मरुस्थलीय क्षेत्र

इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र की रेतीली मिट्टी में जिप्सम का प्रयोग व सेम (जलभराव) की समस्या; उचित जल-निकास आवश्यक।

वैज्ञानिक वर्गीकरण (अमेरिकी "सॉइल टैक्सोनॉमी")

राजस्थान की मिट्टियाँ इन वर्गों (ऑर्डर) में रखी जाती हैं (भारतीय मृदा सर्वेक्षण संस्थानों के अनुसार):

ऑर्डर क्षेत्र
एरिडिसोल्स (Aridisols) पश्चिमी शुष्क क्षेत्र (मरुस्थल)
एंटिसोल्स (Entisols) रेतीले क्षेत्र, नवीन जलोढ़
इन्सेप्टिसोल्स (Inceptisols) पूर्वी मैदान, अरावली (भाग)
एल्फिसोल्स (Alfisols) अरावली के पूर्व, मेवाड़-हाड़ौती (भाग)
वर्टिसोल्स (Vertisols) काली मिट्टी — हाड़ौती

(यह वर्गीकरण राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो — NBSS&LUP के अध्ययनों पर आधारित है।)

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