Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 6 min read
ध्यान दें। जन्म-वर्ष और मेलों की तिथियाँ लोक परंपरा पर आधारित हैं और स्रोतों में थोड़ी भिन्न मिलती हैं। यहाँ परीक्षा में प्रचलित तथ्य दिए गए हैं।
भक्ति आंदोलन और संत संप्रदाय
मध्यकाल में राजस्थान में निर्गुण और सगुण दोनों धाराओं के संतों ने जाति-पाँति, आडंबर और अंधविश्वास का विरोध किया और सरल भक्ति का प्रचार किया।
प्रमुख संप्रदाय
| संप्रदाय | संस्थापक | प्रमुख पीठ/क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|---|
| बिश्नोई | गुरु जंभेश्वर (जाम्भोजी) — जन्म 1451, पीपासर (नागौर) | मुकाम (नोखा, बीकानेर) — समाधि; मेला | 1485 में स्थापना; 29 नियम; वृक्ष-पशु रक्षा; खेजड़ली (1730) |
| दादू पंथ (परब्रह्म संप्रदाय) | दादू दयाल (1544–1603) | नरायणा (जयपुर) मुख्य पीठ; साधना सांभर | "राजस्थान का कबीर"; ग्रंथ "दादू वाणी"; निर्गुण भक्ति; शिष्य सुंदरदास, रज्जब आदि |
| रामस्नेही | रामानंद की परंपरा; शाखाएँ | चार प्रमुख पीठ: रेण (नागौर) — दरियावजी; सिंहथल (बीकानेर) — हरिरामदास; शाहपुरा (भीलवाड़ा) — रामचरण जी (मुख्य पीठ); खेड़ापा (जोधपुर) — रामदास जी | "राम-नाम" जप; मूर्तिपूजा का विरोध |
| निरंजनी | हरिदास निरंजनी | गाढ़ा (नागौर/डीडवाना) | निर्गुण; निरंजन |
| लालदासी | लालदास जी | अलवर, भरतपुर (मेवात) | मेव समाज में प्रभाव |
| चरणदासी | चरणदास जी | डेहरा (अलवर); मुख्य पीठ दिल्ली | भक्त शिष्याएँ सहजोबाई, दयाबाई |
| जसनाथी | जसनाथ जी | कतरियासर (बीकानेर) | अग्नि नृत्य (धधकते अंगारों पर) |
| नाथ संप्रदाय | (गोरखनाथ परंपरा) | जोधपुर — महामंदिर | योग, हठ-योग; जोधपुर के राठौड़ों से जुड़ाव |
| पुष्टिमार्ग (वल्लभ संप्रदाय) | वल्लभाचार्य | नाथद्वारा (राजसमंद) — श्रीनाथजी | कृष्ण भक्ति; श्रीनाथजी की मूर्ति मथुरा-गोवर्धन से लाई गई (17वीं सदी, राणा राजसिंह के काल) |
| निम्बार्क संप्रदाय | निम्बार्काचार्य | सलेमाबाद (अजमेर) | द्वैताद्वैत |
| गौड़ीय (चैतन्य) संप्रदाय | चैतन्य महाप्रभु | गोविंद देव जी, जयपुर | सवाई जयसिंह ने मूर्ति को जयपुर में स्थापित किया |
| रामानंदी (वैष्णव) | रामानंद | गलता जी (जयपुर) — कृष्णदास पयहारी | "उत्तर तोताद्रि" |
प्रमुख संत और भक्त
| संत | परिचय |
|---|---|
| मीराबाई | जन्म लगभग 1498, कुड़की (मेड़ता, नागौर); कृष्ण की अनन्य भक्त; विवाह राणा सांगा के पुत्र भोजराज से; पदावली; मेड़ता में चारभुजा मंदिर; "राजस्थान की राधा" |
| संत पीपा | गागरोण (झालावाड़) के खींची शासक (पीपाराव); रामानंद के शिष्य; दर्जी समाज द्वारा श्रद्धेय |
| संत धन्ना | टोंक (धुवन गाँव) में जन्म; रामानंद के शिष्य; किसान संत |
| संत सुंदरदास | दौसा; दादू के शिष्य; "राजस्थान का शंकराचार्य" (प्रचलित उपाधि) |
| संत मावजी | बाँसवाड़ा (साबला); वागड़ में बेणेश्वर धाम; "चौपड़ा" (काव्य-ग्रंथ), भविष्यवाणियाँ; आदिवासियों में सम्मानित |
| गवरी बाई | डूंगरपुर; "वागड़ की मीरा" |
| कर्मा बाई | जगन्नाथ की भक्त; खिचड़ी की लोक कथा |
| संत रज्जब, खेतसी | दादू पंथ के अनुयायी |
लोक देवता
लोक देवता वे वीर पुरुष हैं जिन्होंने गौ-रक्षा, पशु-रक्षा, धर्म-रक्षा या समाज-हित में जान दी और लोक में पूजित हुए। प्रायः पंच-पीर कहे जाते हैं: पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मेहाजी मांगलिया और गोगाजी (कुछ पुस्तकें गोगाजी के स्थान पर मेहाजी के साथ इन्हें गिनती हैं)।
| लोक देवता | स्थान | विशेषताएँ |
|---|---|---|
| पाबूजी | कोलू (फलौदी, जोधपुर) | "ऊँटों के देवता"; ऊँट-पालकों (रेबारी/राईका) के आराध्य; ऊँटनी "केसर कालमी"; "लक्ष्मण के अवतार"; फड़ — नायक/भील भोपे — रावणहत्था वाद्य के साथ; मेला — कोलू (चैत्र अमावस्या) |
| रामदेवजी | रामदेवरा (रुणिचा), जैसलमेर | तंवर राजपूत; "रामसा पीर"; कामड़ पंथ, तेरहताली नृत्य; मेला — भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी; हिंदू-मुस्लिम एकता; "पीरों के पीर" |
| गोगाजी | गोगामेड़ी (नोहर, हनुमानगढ़); जन्म ददरेवा (चूरू) | चौहान; "जाहरवीर"; सर्प-दंश से रक्षा के देवता; गोगा नवमी (भाद्रपद कृष्ण नवमी); गोगामेड़ी में मस्जिद-जैसी मजार; "खेजड़ी के नीचे पूजा", "गोरखनाथ के शिष्य" |
| तेजाजी | खरनाल (नागौर) | जाट; सर्प-दंश; "काला-बाला के देवता"; परबतसर (नागौर) पशु मेला — भाद्रपद शुक्ल 10; किसान कृषि कार्य के पूर्व पूजा |
| हड़बू जी | भूण्डेल (नागौर); मुख्य पीठ बैंगटी (फलौदी) | सांखला राजपूत; रामदेवजी के मौसेरे भाई; शकुन शास्त्र के ज्ञाता; "गाड़ी" की पूजा (अपंग गाड़ी में) |
| मेहाजी मांगलिया | बापणी/ मंडोर के निकट (जोधपुर) | मांगलिया राजपूत; पंच पीरों में |
| देवनारायण जी | आसींद (भीलवाड़ा) | गुर्जर; बगड़ावत वंश; फड़ — "देवनारायण की फड़" (सबसे लंबी फड़); विष्णु के अवतार माने जाते हैं; देवमाली (ब्यावर) में मुख्य स्थल; जंतर वाद्य |
| मल्लीनाथ जी | तिलवाड़ा (बाड़मेर) | राठौड़; मल्लीनाथ पशु मेला — चैत्र कृष्ण 11 से 15; थारपारकर गाय/घोड़े |
| वीर कल्ला जी | सामलिया (डूंगरपुर) | "चार हाथों वाले देवता"; योग-ज्ञान; अकबर के विरुद्ध चित्तौड़ (1568) में जयमल के साथ बलिदान |
| तल्लीनाथ जी | पांचोटा (जालौर) | राठौड़; वृक्ष-संरक्षण की परंपरा से जुड़े |
| बिग्गाजी | रीड़ी (बीकानेर) | गौ-रक्षक |
| देव बाबा | नगला जहाज (भरतपुर) | गुर्जरों और ग्वालों के देवता; पशु-चिकित्सा के देवता |
| पनराज जी | नगा (जैसलमेर) | गायों के रक्षक |
| हरिराम बाबा | झोरड़ा (नागौर) | सर्प-दंश उपचार |
| केसरिया कुँवर जी | — | गोगाजी के पुत्र |
| भूरिया बाबा (गौतमेश्वर) | अरणोद (प्रतापगढ़)/सिरोही | मीणा-गरासिया जनजातियों के देवता |
| डूंगजी-जवाहर जी | शेखावाटी (सीकर) | अंग्रेजों के खजाने लूटकर गरीबों में बाँटने वाले (लोक नायक) |
(स्थान-मिलान में पुस्तकों में भेद मिलता है; प्रमुख देवता, स्थान और विशेषता याद रखें।)
लोक देवियाँ
| देवी | स्थान | विशेषता |
|---|---|---|
| करणी माता | देशनोक (बीकानेर) | बीकानेर राजघराने की कुलदेवी; चूहों (काबा) वाला मंदिर; "चूहों वाली माता" |
| जीण माता | रैवासा (सीकर) | चौहान वंश की आराध्य; मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब की कथा (मधुमक्खियाँ) |
| शीतला माता | चाकसू (जयपुर) | चेचक/बच्चों की देवी; बास्योड़ा (शीतलाष्टमी) में ठंडा भोजन; "सैढल माता" |
| शाकंभरी देवी | सांभर (जयपुर) | चौहानों की कुलदेवी |
| नागणेची माता | नागाणा (बाड़मेर) | जोधपुर के राठौड़ों की कुलदेवी |
| जमवाय माता | जमवारामगढ़ (जयपुर) | कछवाहा वंश की कुलदेवी |
| बाण माता | चित्तौड़गढ़ | सिसोदिया (मेवाड़) की कुलदेवी |
| आशापुरा माता | नाडोल (पाली); पोकरण | चौहानों की देवी |
| आई माता | बिलाड़ा (जोधपुर) | सीरवी समाज की आराध्य; "दीवान" परंपरा |
| कैला देवी | करौली | यादवों (जादौन) की कुलदेवी; लांगुरिया गीत; मेला चैत्र |
| सच्चियाय माता | ओसियां (जोधपुर) | ओसवाल समाज की कुलदेवी |
| तनोट माता | तनोट (जैसलमेर) | भाटी वंश; 1965 और 1971 के युद्ध में बमों के न फटने की कथा; BSF द्वारा पूजित — "सैनिकों की देवी" |
| आवड़ माता | जैसलमेर | भाटियों की कुलदेवी (परंपरा) |
| राणी सती (नारायणी देवी) | झुंझुनूँ | अग्रवालों में पूजनीय; मेला भाद्रपद |
| सुगाली माता | आउवा (पाली) | 1857 से जुड़ी देवी |
| त्रिपुरा सुंदरी | तलवाड़ा (बाँसवाड़ा) | शक्ति पीठ |
| सकराय माता | उदयपुरवाटी (झुंझुनूँ) | खंडेलवाल की कुलदेवी |
परीक्षा-उपयोगी तथ्य
- पंच पीर: पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मेहाजी, गोगाजी।
- ऊँटों के देवता — पाबूजी; सर्प-दंश — गोगाजी, तेजाजी; फड़ — पाबूजी व देवनारायण।
- रामदेवजी का मेला — रामदेवरा (जैसलमेर); तेजाजी — परबतसर (नागौर); मल्लीनाथ — तिलवाड़ा (बाड़मेर)।
- दादू — राजस्थान का कबीर; मीरा — कुड़की (मेड़ता)।
- रामस्नेही की प्रमुख शाखा — शाहपुरा।
- पाबूजी को सर्प-दंश का देवता बताना (वे ऊँटों के देवता हैं; सर्प-दंश — गोगाजी/तेजाजी)।
- रामदेवजी का स्थान बाड़मेर बताना (रामदेवरा — जैसलमेर)।
- रामस्नेही संप्रदाय को रामानुज संप्रदाय से मिला देना।
- राजस्थान में भक्ति आंदोलन के बिश्नोई, दादू, रामस्नेही, जसनाथी, पुष्टिमार्ग आदि संप्रदाय और मीरा, पीपा, धन्ना जैसे संत हुए।
- पंच पीर — पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मेहाजी, गोगाजी — प्रमुख लोक देवता हैं।
- देवनारायण और पाबूजी की फड़ें, गोगाजी (सर्प), तेजाजी (किसान), मल्लीनाथ (तिलवाड़ा) प्रसिद्ध हैं।
- करणी माता, जीण माता, शीतला माता, नागणेची आदि लोक देवियाँ वंशों की कुलदेवियाँ भी हैं।