Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read
ध्यान दें। निर्माण-काल और निर्माताओं के नाम स्रोतों में थोड़े भिन्न मिलते हैं। यहाँ परीक्षा में प्रचलित तथ्य दिए गए हैं।
स्थापत्य कला की सामान्य विशेषताएँ
राजस्थान की स्थापत्य कला शौर्य, भक्ति और सौंदर्य तीनों का संगम है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ:
- पत्थर का प्रयोग — बलुआ पत्थर (लाल, पीला), संगमरमर, ग्रेनाइट; क्षेत्र के अनुसार स्थानीय पत्थर।
- सुदृढ़ दुर्ग — पहाड़ियों पर, परकोटे, बुर्ज, द्वार (पोल) और जल-संचयन के साधन सहित।
- झरोखे, जालियाँ और छज्जे — छिद्रित पत्थर की जालियाँ (हवा-प्रकाश और परदे दोनों के लिए)।
- छतरियाँ — स्तंभों पर टिकी गुंबदाकार मंडपनुमा संरचनाएँ (स्मारक और अलंकरण)।
- सजावटी नक्काशी और भित्ति-चित्र।
- राजपूत और मुग़ल शैलियों का समन्वय — विशेषकर आमेर, जयपुर, बीकानेर, बूंदी के महलों में।
- जल-स्थापत्य — बावड़ियाँ, झालरे, कुंड, तालाब।
मंदिर स्थापत्य
शैलियाँ
| शैली | विवरण |
|---|---|
| नागर शैली | उत्तर भारत की प्रमुख शैली — शिखर (रेखा-शिखर), गर्भगृह, मंडप, ऊँची जगती (चबूतरा) |
| मारू-गुर्जर (महामारू) शैली | गुर्जर-प्रतिहार और सोलंकी काल (8वीं–12वीं सदी); राजस्थान-गुजरात में विकसित; सूक्ष्म नक्काशी, सुंदर स्तंभ, मंडप-अलंकरण; महामारू और महागुर्जर उप-शैलियाँ |
| जैन मंदिर शैली | संगमरमर की बारीक नक्काशी — दिलवाड़ा, रणकपुर |
| वैष्णव/शैव मंदिर | जगत, एकलिंगजी, नाथद्वारा |
प्रमुख मंदिर
| मंदिर | स्थान | विशेषता |
|---|---|---|
| ओसियां के मंदिर | जोधपुर | "राजस्थान का भुवनेश्वर" कहा जाता है; सच्चियाय माता मंदिर; महावीर मंदिर (प्रतिहार काल); मारू-गुर्जर शैली के प्रारंभिक उदाहरण |
| हर्षद माता मंदिर / चाँद बावड़ी | आभानेरी (दौसा) | प्रतिहार काल; चाँद बावड़ी — बहुत गहरी, सैकड़ों सीढ़ियाँ (प्रसिद्ध) |
| बाड़ोली के मंदिर | चित्तौड़गढ़ (रावतभाटा के निकट) | घाटेश्वर शिव मंदिर आदि; प्रतिहार काल; नक्काशी |
| किराडू के मंदिर | बाड़मेर | "राजस्थान का खजुराहो"; सोमेश्वर मंदिर; सोलंकी शैली |
| जगत का अंबिका मंदिर | उदयपुर | "मेवाड़ का खजुराहो"; शक्ति पीठ |
| भंडदेवरा (रामगढ़) का मंदिर | बारां | "राजस्थान का मिनी खजुराहो" |
| एकलिंगजी मंदिर | उदयपुर (कैलाशपुरी) | मेवाड़ के राजाओं के आराध्य; बप्पा रावल से जुड़ा; शिव |
| सास-बहू मंदिर | नागदा (उदयपुर) | वैष्णव (सहस्रबाहु मंदिर का अपभ्रंश) |
| दिलवाड़ा के जैन मंदिर | माउंट आबू (सिरोही) | विमल शाह (1031) — आदिनाथ; वस्तुपाल-तेजपाल (लगभग 1230) — नेमिनाथ; संगमरमर की अद्भुत नक्काशी |
| रणकपुर के जैन मंदिर | पाली | धरणाशाह द्वारा राणा कुंभा के काल में; 1444 स्तंभ; प्रसिद्ध; शिल्पी देपाक |
| ब्रह्मा मंदिर | पुष्कर (अजमेर) | ब्रह्मा को समर्पित दुर्लभ मंदिर |
| गोविंद देवजी मंदिर | जयपुर | कृष्ण |
| श्रीनाथजी मंदिर | नाथद्वारा (राजसमंद) | पुष्टिमार्ग/वल्लभ संप्रदाय |
| खाटू श्यामजी | सीकर | मेला |
| करणी माता (चूहों वाला) मंदिर | देशनोक (बीकानेर) | चूहों (काबा) के लिए प्रसिद्ध |
| सालासर बालाजी | चूरू | हनुमान मंदिर |
| त्रिनेत्र गणेश | रणथंभौर (सवाई माधोपुर) | — |
| कैला देवी | करौली | मेला |