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मध्यप्रदेश का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

1857 के विद्रोह में मध्यप्रदेश (इंदौर, महू, नीमच, सागर, जबलपुर, अमझेरा, ग्वालियर-झाँसी, रानी लक्ष्मीबाई-तात्या टोपे), आदिवासी विद्रोह (टंट्या भील, भीमा नायक, शंकर शाह-रघुनाथ शाह, रानी अवंतीबाई), राष्ट्रीय आंदोलन (झंडा सत्याग्रह, जंगल सत्याग्रह, त्रिपुरी अधिवेशन 1939, भारत छोड़ो), रियासतों के प्रजामंडल और भोपाल विलीनीकरण आंदोलन; प्रमुख सेनानी और परीक्षा-उपयोगी तथ्य।

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Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read

ध्यान दें। तिथियाँ और संख्याएँ स्रोतों में थोड़ी भिन्न मिलती हैं; यहाँ परीक्षा में प्रचलित तथ्य दिए गए हैं।

1857 का विद्रोह — मध्यप्रदेश में

प्रमुख केंद्र

स्थान घटना/नेता
इंदौर 1 जुलाई 1857 — होल्कर सेना के सैनिकों (सआदत खाँ आदि) ने इंदौर रेजीडेंसी पर हमला किया; कर्नल डूरंड (रेजीडेंट) भागकर भोपाल गए; महाराजा तुकोजीराव होल्कर द्वितीय अंग्रेजों की ओर रहे
महू छावनी में विद्रोह (जुलाई 1857)
नीमच 3 जून 1857 — नीमच छावनी में विद्रोह (राजस्थान से जुड़ा)
ग्वालियर सिंधिया (जयाजीराव) अंग्रेजों के साथ रहे; सेना विद्रोही; तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई (झाँसी से) जून 1858 में ग्वालियर पहुँचे
सागर सागर किले में अंग्रेजों की घेराबंदी; स्थानीय सरदारों और बुंदेलों का विद्रोह
जबलपुर (गढ़ा-मंडला) गोंड राजा शंकर शाह और उनके पुत्र रघुनाथ शाह — 18 सितंबर 1857 को तोप के मुँह से उड़ाए गए (अंग्रेजों द्वारा); 52वीं रेजिमेंट में विद्रोह की आशंका
रामगढ़ (मंडला) रानी अवंतीबाई लोधी — 1857 में अंग्रेजों से लड़ीं; 20 मार्च 1858 को घिर जाने पर आत्मबलिदान
धार (अमझेरा) राजा बख्तावर सिंह — अमझेरा (धार); 1857 में विद्रोह; 10 फरवरी 1858 को इंदौर में फाँसी
निमाड़ (खंडवा, खरगोन) भीमा नायक (भील), खाज्या नायक, सीताराम कँवर आदि
भोपाल नवाब सिकंदर बेगम अंग्रेजों के साथ ; पर स्थानीय सैनिकों में असंतोष
बुंदेलखंड (झाँसी, पन्ना, चरखारी) झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (अब उत्तर प्रदेश); बानपुर के राजा मर्दन सिंह, शाहगढ़ के राजा बख्तबली आदि

रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और ग्वालियर

  • रानी लक्ष्मीबाई — झाँसी पर 1858 में घेराबंदी (सर ह्यू रोज़); कालपी होकर ग्वालियर पहुँचीं।
  • ग्वालियर के किले पर जून 1858 में अधिकार; 18 जून 1858 — फूलबाग (ग्वालियर) में युद्ध में वीरगति।
  • तात्या टोपे — 1858–59 में मध्य भारत (चंदेरी, सागर, नर्मदा पार, निमाड़) में गुरिल्ला युद्ध; नरवर के राजा मानसिंह के विश्वासघात से अप्रैल 1859 में पकड़े गए; शिवपुरी में 18 अप्रैल 1859 को फाँसी।

आदिवासी विद्रोह और नायक

नायक क्षेत्र विवरण
टंट्या भील (टंट्या मामा) निमाड़ (खंडवा) 1878–1889; गरीबों के मसीहा; अंग्रेजों का खजाना और साहूकार लूटकर गरीबों में बाँटा; पकड़े गए और 4 दिसंबर 1889 को जबलपुर में फाँसी (प्रचलित तिथि); पातालपानी (इंदौर) में स्मारक
भीमा नायक निमाड़/बड़वानी भील नायक; 1857 में अंग्रेजों से संघर्ष; पकड़े गए और अंडमान (काला पानी) में निर्वासित (मृत्यु 1876, प्रचलित)
शंकर शाह-रघुनाथ शाह जबलपुर गोंड पिता-पुत्र, 1857 में शहीद
रानी अवंतीबाई रामगढ़ (मंडला) पहली महिला शहीद (मध्यप्रदेश) कही जाती हैं (प्रचलित)
राजा बख्तावर सिंह अमझेरा 1857
खाज्या नायक निमाड़ भील-विद्रोह

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