Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read
ध्यान दें। तिथियाँ और संख्याएँ स्रोतों में थोड़ी भिन्न मिलती हैं; यहाँ परीक्षा में प्रचलित तथ्य दिए गए हैं।
1857 का विद्रोह — मध्यप्रदेश में
प्रमुख केंद्र
| स्थान | घटना/नेता |
|---|---|
| इंदौर | 1 जुलाई 1857 — होल्कर सेना के सैनिकों (सआदत खाँ आदि) ने इंदौर रेजीडेंसी पर हमला किया; कर्नल डूरंड (रेजीडेंट) भागकर भोपाल गए; महाराजा तुकोजीराव होल्कर द्वितीय अंग्रेजों की ओर रहे |
| महू | छावनी में विद्रोह (जुलाई 1857) |
| नीमच | 3 जून 1857 — नीमच छावनी में विद्रोह (राजस्थान से जुड़ा) |
| ग्वालियर | सिंधिया (जयाजीराव) अंग्रेजों के साथ रहे; सेना विद्रोही; तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई (झाँसी से) जून 1858 में ग्वालियर पहुँचे |
| सागर | सागर किले में अंग्रेजों की घेराबंदी; स्थानीय सरदारों और बुंदेलों का विद्रोह |
| जबलपुर (गढ़ा-मंडला) | गोंड राजा शंकर शाह और उनके पुत्र रघुनाथ शाह — 18 सितंबर 1857 को तोप के मुँह से उड़ाए गए (अंग्रेजों द्वारा); 52वीं रेजिमेंट में विद्रोह की आशंका |
| रामगढ़ (मंडला) | रानी अवंतीबाई लोधी — 1857 में अंग्रेजों से लड़ीं; 20 मार्च 1858 को घिर जाने पर आत्मबलिदान |
| धार (अमझेरा) | राजा बख्तावर सिंह — अमझेरा (धार); 1857 में विद्रोह; 10 फरवरी 1858 को इंदौर में फाँसी |
| निमाड़ (खंडवा, खरगोन) | भीमा नायक (भील), खाज्या नायक, सीताराम कँवर आदि |
| भोपाल | नवाब सिकंदर बेगम अंग्रेजों के साथ ; पर स्थानीय सैनिकों में असंतोष |
| बुंदेलखंड (झाँसी, पन्ना, चरखारी) | झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (अब उत्तर प्रदेश); बानपुर के राजा मर्दन सिंह, शाहगढ़ के राजा बख्तबली आदि |
रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और ग्वालियर
- रानी लक्ष्मीबाई — झाँसी पर 1858 में घेराबंदी (सर ह्यू रोज़); कालपी होकर ग्वालियर पहुँचीं।
- ग्वालियर के किले पर जून 1858 में अधिकार; 18 जून 1858 — फूलबाग (ग्वालियर) में युद्ध में वीरगति।
- तात्या टोपे — 1858–59 में मध्य भारत (चंदेरी, सागर, नर्मदा पार, निमाड़) में गुरिल्ला युद्ध; नरवर के राजा मानसिंह के विश्वासघात से अप्रैल 1859 में पकड़े गए; शिवपुरी में 18 अप्रैल 1859 को फाँसी।
आदिवासी विद्रोह और नायक
| नायक | क्षेत्र | विवरण |
|---|---|---|
| टंट्या भील (टंट्या मामा) | निमाड़ (खंडवा) | 1878–1889; गरीबों के मसीहा; अंग्रेजों का खजाना और साहूकार लूटकर गरीबों में बाँटा; पकड़े गए और 4 दिसंबर 1889 को जबलपुर में फाँसी (प्रचलित तिथि); पातालपानी (इंदौर) में स्मारक |
| भीमा नायक | निमाड़/बड़वानी | भील नायक; 1857 में अंग्रेजों से संघर्ष; पकड़े गए और अंडमान (काला पानी) में निर्वासित (मृत्यु 1876, प्रचलित) |
| शंकर शाह-रघुनाथ शाह | जबलपुर | गोंड पिता-पुत्र, 1857 में शहीद |
| रानी अवंतीबाई | रामगढ़ (मंडला) | पहली महिला शहीद (मध्यप्रदेश) कही जाती हैं (प्रचलित) |
| राजा बख्तावर सिंह | अमझेरा | 1857 |
| खाज्या नायक | निमाड़ | भील-विद्रोह |