Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read
ध्यान दें। शासनकाल की तिथियाँ स्रोतों में 5–10 वर्ष तक भिन्न मिलती हैं। यहाँ परीक्षा में सर्वाधिक प्रचलित तिथियाँ दी गई हैं।
परमार वंश (मालवा)
- राजधानी: पहले उज्जैन, बाद में धार।
- संस्थापक: उपेंद्र/कृष्णराज (9वीं–10वीं सदी) — राष्ट्रकूटों के सामंत; स्वतंत्र शक्ति सीयक द्वितीय (हर्ष) से।
प्रमुख शासक
| शासक | विवरण |
|---|---|
| वाक्पति मुंज (लगभग 974–995) | कवि और विद्वान का आश्रयदाता; कल्याणी के चालुक्य तैलप द्वितीय से युद्ध में पराजित व मारा गया; मुंज सागर (धार) का निर्माण; दरबारी — पद्मगुप्त (नवसाहसांक चरित), धनंजय (दशरूपक), धनिक |
| राजा भोज (लगभग 1010–1055) | परमार वंश का सर्वश्रेष्ठ शासक; "कविराज"; विद्वान और निर्माता; धार राजधानी; भोजशाला (धार; संस्कृत विद्यालय और सरस्वती मंदिर); भोजपुर (रायसेन) का भोजेश्वर शिव मंदिर ("पूर्व का सोमनाथ"; अधूरा विशाल शिवलिंग); भोपाल का बड़ा तालाब (भोजताल) का निर्माण परंपरा से भोज के नाम से जुड़ा; भोजपुर बाँध |
| उदयादित्य | भोज के बाद परमारों का पुनरुत्थान; उदयपुर (विदिशा) का नीलकंठेश्वर मंदिर (उदयेश्वर) |
| जयवर्मन, देवपाल आदि | परमार वंश का पतन |
भोज की रचनाएँ (परंपरा अनुसार)
- सरस्वती कंठाभरण (अलंकार/काव्यशास्त्र), समरांगण सूत्रधार (वास्तु-शास्त्र), श्रृंगार प्रकाश, चारुचर्या, योगसूत्र की वृत्ति (राजमार्तण्ड), आयुर्वेद सर्वस्व, युक्ति-कल्पतरु।
- लोककथा: "कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली" कहावत।
पतन
- 1305 में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति ऐन-उल-मुल्क मुल्तानी ने मालवा जीता (अंतिम परमार शासक महलकदेव/महलक देव); बाद में दिल्ली सल्तनत और मालवा सल्तनत।
चंदेल वंश (बुंदेलखंड — जेजाकभुक्ति)
- राजधानी: खजुराहो, महोबा, कालिंजर (दुर्ग)।
- संस्थापक: नन्नुक (लगभग 9वीं सदी); पहले गुर्जर-प्रतिहारों के सामंत।
प्रमुख शासक
| शासक | विवरण |
|---|---|
| यशोवर्मन (लगभग 925–950) | लक्ष्मण (चतुर्भुज) मंदिर, खजुराहो (लगभग 954 ई.) का निर्माण; कालिंजर विजय |
| धंग (लगभग 950–1002) | सबसे शक्तिशाली; विश्वनाथ मंदिर, पार्श्वनाथ जैन मंदिर, जवारी मंदिर आदि; खजुराहो का स्वर्णकाल; गज़नी के सबुक्तगीन के विरुद्ध हिंदूशाही के साथ संघ |
| गंड | महमूद ग़ज़नवी के आरंभिक आक्रमणों का सामना |
| विद्याधर (लगभग 1003–1035) | महमूद गज़नवी का दो बार (1019, 1022) सफल प्रतिरोध; कंदरिया महादेव मंदिर (खजुराहो का सबसे विशाल) का निर्माण परंपरा से; कन्नौज के प्रतिहार शासक राज्यपाल को दंडित किया |
| कीर्तिवर्मन (लगभग 1060–1100) | कृष्ण मिश्र का नाटक "प्रबोध चंद्रोदय" (चंदेल दरबार में); कल्चुरी कर्ण को हराया; कीरत सागर (महोबा) |
| मदनवर्मन | मदनसागर (महोबा) |
| परमर्दिदेव/परमाल (लगभग 1165–1203) | आल्हा और ऊदल (वीर सेनापति; आल्हखंड — जगनिक द्वारा, लोक काव्य); 1182 में पृथ्वीराज चौहान से पराजित (महोबा की लड़ाई); 1202–03 में कुतुबुद्दीन ऐबक से कालिंजर हारा |
खजुराहो के मंदिर
- UNESCO विश्व धरोहर (1986); नागर शैली; मंदिर समूह:
| समूह | प्रमुख मंदिर |
|---|---|
| पश्चिमी समूह | कंदरिया महादेव, लक्ष्मण, विश्वनाथ, चित्रगुप्त, देवी जगदंबा, मतंगेश्वर, वराह, चौंसठ योगिनी |
| पूर्वी समूह | जैन — पार्श्वनाथ, आदिनाथ, घंटाई; ब्रह्मा, वामन, जवारी |
| दक्षिणी समूह | दूल्हादेव, चतुर्भुज |
- विशेषता: ऊँची जगती, अर्ध-मंडप, मंडप, महामंडप, अंतराल, गर्भगृह; शिखर (पर्वत-शिखर जैसी रचना); मिथुन (कामुक) शिल्प — बाहरी दीवार पर; कला, भक्ति और जीवन के विविध रूप।
- खजुराहो नृत्य महोत्सव — फरवरी।