Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read
ध्यान दें। शासन-काल और कुछ घटनाओं की तिथियाँ विद्वानों में भिन्न हैं। यहाँ परीक्षा में स्वीकृत तथ्य दिए गए हैं।
प्राचीन मध्यप्रदेश — पृष्ठभूमि
- पाषाण काल: भीमबेटका (रायसेन) के शैलचित्र और आदमगढ़ (होशंगाबाद/नर्मदापुरम), नर्मदा घाटी (हथनौरा — मानव कपाल) में आदि मानव के प्रमाण।
- ताम्रपाषाण: कायथा (उज्जैन), नावदाटोली (खरगोन), एरण (सागर), नागदा — मालवा संस्कृति।
- वैदिक/पौराणिक: नर्मदा, चर्मण्वती (चंबल) के उल्लेख; हैहय वंश (माहिष्मती — महेश्वर/मंधाता) की परंपरा।
- महाजनपद काल (छठी शताब्दी ई.पू.): अवंति (राजधानी उज्जयिनी और महिष्मती; राजा प्रद्योत) — सोलह महाजनपदों में; चेदि (बुंदेलखंड क्षेत्र); दशार्ण (विदिशा क्षेत्र)।
- नंद और मौर्य के अधीन अवंति का मगध से जुड़ाव।
मौर्य काल
- चंद्रगुप्त मौर्य और बिंदुसार के अधीन मध्यप्रदेश के बड़े भाग मगध साम्राज्य में शामिल।
- अशोक — मौर्य साम्राज्य की ओर से उज्जयिनी के उप-राज्यपाल (कुमार) रहे; विदिशा की श्रेष्ठि-पुत्री देवी से विवाह (बौद्ध परंपरा); पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा का जन्म इसी क्षेत्र की परंपरा से जोड़ा जाता है।
- सांची (रायसेन): महास्तूप का निर्माण अशोक (लगभग 3री शताब्दी ई.पू.) ने कराया (ईंटों का); बाद में शुंगों ने विस्तार किया और सातवाहनों के काल में तोरण द्वार; UNESCO विश्व धरोहर (1989)।
- अन्य बौद्ध स्थल: सतधारा, सोनारी, अंधेर, भोजपुर (विदिशा क्षेत्र) के स्तूप।
- अशोक के शिलालेख: रूपनाथ (जबलपुर), गुजर्रा (दतिया), पानगुड़ारिया (सीहोर), सांची का स्तंभ लेख।
- उज्जयिनी — मौर्य काल में प्रमुख प्रशासनिक और व्यापारिक नगर (उत्तर-दक्षिण पथ का केंद्र)।
शुंग काल (लगभग 185 ई.पू. से)
- पुष्यमित्र शुंग (मौर्य सेनापति) ने 185 ई.पू. में अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ को हटाकर शुंग वंश की स्थापना की; राजधानी पाटलिपुत्र; विदिशा उप-राजधानी।
- अग्निमित्र — पुष्यमित्र का पुत्र, विदिशा का राज्यपाल; कालिदास के नाटक "मालविकाग्निमित्रम्" का नायक।
- भरहुत (सतना) — शुंग काल का स्तूप (वेदिका और तोरण पर जातक-कथाओं की शिल्पकला); शुंग कला का श्रेष्ठ उदाहरण (अब अवशेष कोलकाता में)।
- बेसनगर (विदिशा) — हेलियोडोरस का गरुड़ध्वज स्तंभ (लगभग 110 ई.पू. का अभिलेख) — यवन (यूनानी) राजदूत हेलियोडोरस ने भागवत धर्म (वासुदेव) स्वीकार कर वासुदेव के सम्मान में स्थापित किया; एंतलिकित (तक्षशिला का यूनानी शासक) के दूत; भागभद्र (शुंग शासक) का उल्लेख।
- सांची का महास्तूप शुंगकाल में पत्थर के आवरण से बड़ा किया गया।