Last reviewed 1 Oct 2026 · 9 min read
व्याकरण क्या है?
व्याकरण वह शास्त्र है जो भाषा को शुद्ध बोलना और लिखना सिखाता है। इसके तीन मुख्य अंग हैं — वर्ण-विचार (वर्णों का अध्ययन), शब्द-विचार (शब्दों के भेद और रूप) और वाक्य-विचार (वाक्य की रचना)। यहाँ शब्द-विचार के प्रमुख भाग दिए जा रहे हैं।
शब्द-भेद (विकार के आधार पर)
| प्रकार | विकार (रूप-परिवर्तन) | भेद |
|---|---|---|
| विकारी शब्द | लिंग, वचन, कारक या काल के अनुसार रूप बदलता है | संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया |
| अविकारी शब्द (अव्यय) | रूप कभी नहीं बदलता | क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक |
(अर्थ के आधार पर शब्द-भेद आठ हैं; इन्हें विकारी चार + अविकारी चार माना जाता है।)
1. संज्ञा
किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव या गुण के नाम को संज्ञा कहते हैं।
| भेद | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| व्यक्तिवाचक | किसी विशेष का नाम | राम, गंगा, दिल्ली, हिमालय |
| जातिवाचक | पूरी जाति का बोध | लड़का, नदी, पर्वत, शहर |
| भाववाचक | गुण, दशा, भाव का नाम (जिसे छू नहीं सकते) | मित्रता, बचपन, मिठास, सुंदरता, क्रोध |
| द्रव्यवाचक (पदार्थवाचक) | पदार्थ या धातु | सोना, घी, पानी, दूध, लोहा |
| समूहवाचक | समूह का बोध | कक्षा, सेना, भीड़, परिवार, गुच्छा |
- भाववाचक संज्ञा बनाने के तरीके: जातिवाचक से (मित्र → मित्रता, बच्चा → बचपन, बूढ़ा → बुढ़ापा); सर्वनाम से (अपना → अपनापन, मम → ममता); विशेषण से (मीठा → मिठास, सुंदर → सुंदरता, गरम → गरमी); क्रिया से (लिखना → लिखावट, सजाना → सजावट, चलना → चाल)।
2. सर्वनाम
संज्ञा के स्थान पर आने वाले शब्द — मैं, तुम, वह, यह, कौन आदि।
| भेद | उदाहरण |
|---|---|
| पुरुषवाचक — उत्तम पुरुष (बोलने वाला), मध्यम पुरुष (जिससे बात की जाए), अन्य पुरुष (जिसके बारे में बात हो) | मैं, हम — तू, तुम, आप — वह, वे, यह, ये |
| निश्चयवाचक (पास या दूर की निश्चित वस्तु) | यह, वह, ये, वे |
| अनिश्चयवाचक | कोई, कुछ |
| प्रश्नवाचक | कौन, क्या, किसने |
| संबंधवाचक (दो वाक्यों को जोड़ें) | जो-सो, जिसने-उसने, जैसा-वैसा |
| निजवाचक | आप, स्वयं, खुद (कर्ता के अपने लिए) |
- 'आप' के तीन प्रयोग: आदरसूचक (मध्यम पुरुष: आप कैसे हैं?), निजवाचक (मैं आप चला जाऊँगा = स्वयं), और अन्य पुरुष (आप आए हैं)।
- पुरुष और वचन के आधार पर कर्ता के अनुसार क्रिया बदलती है: मैं जाता हूँ, तुम जाते हो, वह जाता है, हम जाते हैं, वे जाते हैं।
3. विशेषण
संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाला शब्द; जिसकी विशेषता बताई जाए उसे विशेष्य कहते हैं (काला घोड़ा — काला: विशेषण, घोड़ा: विशेष्य)।
| भेद | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| गुणवाचक | गुण, रंग, आकार, दशा, काल, स्थान | अच्छा, लाल, गोल, मोटा, नया, पुराना, ऊँचा |
| परिमाणवाचक | मात्रा या माप बताए — निश्चित और अनिश्चित | दो लीटर दूध; थोड़ा, बहुत, कुछ दूध |
| संख्यावाचक | संख्या बताए — निश्चित (गणनावाचक: एक, दो; क्रमवाचक: पहला, दूसरा; आवृत्तिवाचक: दुगुना, तिगुना; समुदायवाचक: चारों, दोनों; प्रत्येकबोधक: प्रत्येक, हर एक) और अनिश्चित | कुछ, कई, सब, अनेक |
| सार्वनामिक (संकेतवाचक) | सर्वनाम जो संज्ञा से पहले विशेषण का काम करे | यह लड़का, वह किताब, कौन आदमी |
विशेषण की तुलना (तीन अवस्थाएँ)
| अवस्था | उदाहरण |
|---|---|
| मूलावस्था | अच्छा, लंबा, सुंदर |
| उत्तरावस्था (दो की तुलना) | से अच्छा, से अधिक लंबा; श्रेष्ठतर |
| उत्तमावस्था (सबमें सर्वश्रेष्ठ) | सबसे अच्छा, सर्वोत्तम, श्रेष्ठतम, सर्वश्रेष्ठ |
(संस्कृत में: लघु–लघुतर–लघुतम, श्रेष्ठ–श्रेष्ठतर–श्रेष्ठतम।)
विशेषण के रूप-परिवर्तन
आकारांत विशेषण (-आ से अंत) लिंग, वचन के अनुसार बदलते हैं: अच्छा लड़का, अच्छे लड़के, अच्छी लड़की। अन्य विशेषण (सुंदर, लाल, भारी, ऊँचा-नहीं, गोल) प्रायः नहीं बदलते: सुंदर लड़का, सुंदर लड़की; लाल फूल, लाल कमीज़।
4. क्रिया
जिस शब्द से काम का करना या होना (अथवा अवस्था) समझा जाए। मूल रूप (धातु) — जैसे लिख, पढ़, खा, जा; 'ना' लगाने पर क्रिया का सामान्य रूप बनता है: लिखना, पढ़ना।
भेद
| आधार | भेद | उदाहरण |
|---|---|---|
| कर्म के आधार पर | सकर्मक (कर्म हो) — "वह रोटी खाता है" ; अकर्मक (कर्म नहीं) — "वह सोता है, बच्चा रोया" | |
| रचना के आधार पर | प्रेरणार्थक (दूसरे से कराना): पढ़ाना, पढ़वाना; संयुक्त (दो क्रियाओं का मेल): उठ बैठा, जा रहा है; नामधातु (संज्ञा/विशेषण से): हाथियाना, अपनाना, गरमाना; पूर्वकालिक (दूसरी क्रिया से पहले हुई): "वह खाकर सो गया" | |
| सहायक क्रिया | मुख्य क्रिया की सहायता करती है — है, था, रहा, होगा, चुका |
काल
| काल | उपभेद | उदाहरण |
|---|---|---|
| वर्तमान | सामान्य, अपूर्ण, पूर्ण, संदिग्ध, संभाव्य | वह जाता है; वह जा रहा है; वह गया है; वह जाता होगा; वह जाए |
| भूत | सामान्य, आसन्न, पूर्ण, अपूर्ण, संदिग्ध, हेतुहेतुमद् | वह गया; वह गया है; वह गया था; वह जा रहा था; वह गया होगा; यदि वह जाता तो… |
| भविष्यत् | सामान्य, संभाव्य, हेतुहेतुमद् | वह जाएगा; शायद वह जाए |
वाच्य (क्रिया का रूप): कर्तृवाच्य (क्रिया कर्ता के अनुसार): "राम रोटी खाता है" ; कर्मवाच्य (कर्म के अनुसार): "रोटी खाई गई" ; भाववाच्य (क्रिया केवल भाव, अकर्मक में): "मुझसे चला नहीं जाता"।