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व्याकरण — संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, लिंग, वचन व कारक

हिंदी व्याकरण के मूल अंग — शब्द-भेद (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक), संज्ञा के भेद, सर्वनाम के छह भेद, विशेषण के भेद और तुलना, क्रिया के भेद और काल, लिंग-निर्णय के नियम, वचन, कारक और उनके चिह्न, वाच्य — उदाहरणों और परीक्षा-उपयोगी नियमों सहित।

📑 Contents (10 sections)

Last reviewed 1 Oct 2026 · 9 min read

व्याकरण क्या है?

व्याकरण वह शास्त्र है जो भाषा को शुद्ध बोलना और लिखना सिखाता है। इसके तीन मुख्य अंग हैं — वर्ण-विचार (वर्णों का अध्ययन), शब्द-विचार (शब्दों के भेद और रूप) और वाक्य-विचार (वाक्य की रचना)। यहाँ शब्द-विचार के प्रमुख भाग दिए जा रहे हैं।

शब्द-भेद (विकार के आधार पर)

प्रकार विकार (रूप-परिवर्तन) भेद
विकारी शब्द लिंग, वचन, कारक या काल के अनुसार रूप बदलता है संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया
अविकारी शब्द (अव्यय) रूप कभी नहीं बदलता क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक

(अर्थ के आधार पर शब्द-भेद आठ हैं; इन्हें विकारी चार + अविकारी चार माना जाता है।)

1. संज्ञा

किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव या गुण के नाम को संज्ञा कहते हैं।

भेद अर्थ उदाहरण
व्यक्तिवाचक किसी विशेष का नाम राम, गंगा, दिल्ली, हिमालय
जातिवाचक पूरी जाति का बोध लड़का, नदी, पर्वत, शहर
भाववाचक गुण, दशा, भाव का नाम (जिसे छू नहीं सकते) मित्रता, बचपन, मिठास, सुंदरता, क्रोध
द्रव्यवाचक (पदार्थवाचक) पदार्थ या धातु सोना, घी, पानी, दूध, लोहा
समूहवाचक समूह का बोध कक्षा, सेना, भीड़, परिवार, गुच्छा
  • भाववाचक संज्ञा बनाने के तरीके: जातिवाचक से (मित्र → मित्रता, बच्चा → बचपन, बूढ़ा → बुढ़ापा); सर्वनाम से (अपना → अपनापन, मम → ममता); विशेषण से (मीठा → मिठास, सुंदर → सुंदरता, गरम → गरमी); क्रिया से (लिखना → लिखावट, सजाना → सजावट, चलना → चाल)।

2. सर्वनाम

संज्ञा के स्थान पर आने वाले शब्द — मैं, तुम, वह, यह, कौन आदि।

भेद उदाहरण
पुरुषवाचक — उत्तम पुरुष (बोलने वाला), मध्यम पुरुष (जिससे बात की जाए), अन्य पुरुष (जिसके बारे में बात हो) मैं, हम — तू, तुम, आप — वह, वे, यह, ये
निश्चयवाचक (पास या दूर की निश्चित वस्तु) यह, वह, ये, वे
अनिश्चयवाचक कोई, कुछ
प्रश्नवाचक कौन, क्या, किसने
संबंधवाचक (दो वाक्यों को जोड़ें) जो-सो, जिसने-उसने, जैसा-वैसा
निजवाचक आप, स्वयं, खुद (कर्ता के अपने लिए)
  • 'आप' के तीन प्रयोग: आदरसूचक (मध्यम पुरुष: आप कैसे हैं?), निजवाचक (मैं आप चला जाऊँगा = स्वयं), और अन्य पुरुष (आप आए हैं)।
  • पुरुष और वचन के आधार पर कर्ता के अनुसार क्रिया बदलती है: मैं जाता हूँ, तुम जाते हो, वह जाता है, हम जाते हैं, वे जाते हैं।

3. विशेषण

संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाला शब्द; जिसकी विशेषता बताई जाए उसे विशेष्य कहते हैं (काला घोड़ा — काला: विशेषण, घोड़ा: विशेष्य)।

भेद अर्थ उदाहरण
गुणवाचक गुण, रंग, आकार, दशा, काल, स्थान अच्छा, लाल, गोल, मोटा, नया, पुराना, ऊँचा
परिमाणवाचक मात्रा या माप बताए — निश्चित और अनिश्चित दो लीटर दूध; थोड़ा, बहुत, कुछ दूध
संख्यावाचक संख्या बताए — निश्चित (गणनावाचक: एक, दो; क्रमवाचक: पहला, दूसरा; आवृत्तिवाचक: दुगुना, तिगुना; समुदायवाचक: चारों, दोनों; प्रत्येकबोधक: प्रत्येक, हर एक) और अनिश्चित कुछ, कई, सब, अनेक
सार्वनामिक (संकेतवाचक) सर्वनाम जो संज्ञा से पहले विशेषण का काम करे यह लड़का, वह किताब, कौन आदमी

विशेषण की तुलना (तीन अवस्थाएँ)

अवस्था उदाहरण
मूलावस्था अच्छा, लंबा, सुंदर
उत्तरावस्था (दो की तुलना) से अच्छा, से अधिक लंबा; श्रेष्ठतर
उत्तमावस्था (सबमें सर्वश्रेष्ठ) सबसे अच्छा, सर्वोत्तम, श्रेष्ठतम, सर्वश्रेष्ठ

(संस्कृत में: लघु–लघुतर–लघुतम, श्रेष्ठ–श्रेष्ठतर–श्रेष्ठतम।)

विशेषण के रूप-परिवर्तन

आकारांत विशेषण (-आ से अंत) लिंग, वचन के अनुसार बदलते हैं: अच्छा लड़का, अच्छे लड़के, अच्छी लड़की। अन्य विशेषण (सुंदर, लाल, भारी, ऊँचा-नहीं, गोल) प्रायः नहीं बदलते: सुंदर लड़का, सुंदर लड़की; लाल फूल, लाल कमीज़।

4. क्रिया

जिस शब्द से काम का करना या होना (अथवा अवस्था) समझा जाए। मूल रूप (धातु) — जैसे लिख, पढ़, खा, जा; 'ना' लगाने पर क्रिया का सामान्य रूप बनता है: लिखना, पढ़ना।

भेद

आधार भेद उदाहरण
कर्म के आधार पर सकर्मक (कर्म हो) — "वह रोटी खाता है" ; अकर्मक (कर्म नहीं) — "वह सोता है, बच्चा रोया"
रचना के आधार पर प्रेरणार्थक (दूसरे से कराना): पढ़ाना, पढ़वाना; संयुक्त (दो क्रियाओं का मेल): उठ बैठा, जा रहा है; नामधातु (संज्ञा/विशेषण से): हाथियाना, अपनाना, गरमाना; पूर्वकालिक (दूसरी क्रिया से पहले हुई): "वह खाकर सो गया"
सहायक क्रिया मुख्य क्रिया की सहायता करती है — है, था, रहा, होगा, चुका

काल

काल उपभेद उदाहरण
वर्तमान सामान्य, अपूर्ण, पूर्ण, संदिग्ध, संभाव्य वह जाता है; वह जा रहा है; वह गया है; वह जाता होगा; वह जाए
भूत सामान्य, आसन्न, पूर्ण, अपूर्ण, संदिग्ध, हेतुहेतुमद् वह गया; वह गया है; वह गया था; वह जा रहा था; वह गया होगा; यदि वह जाता तो…
भविष्यत् सामान्य, संभाव्य, हेतुहेतुमद् वह जाएगा; शायद वह जाए

वाच्य (क्रिया का रूप): कर्तृवाच्य (क्रिया कर्ता के अनुसार): "राम रोटी खाता है" ; कर्मवाच्य (कर्म के अनुसार): "रोटी खाई गई" ; भाववाच्य (क्रिया केवल भाव, अकर्मक में): "मुझसे चला नहीं जाता"।

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