Last reviewed 1 Oct 2026 · 7 min read
उपसर्ग क्या है?
उपसर्ग वे शब्दांश हैं जो किसी शब्द के आरंभ में जुड़कर उसके अर्थ में विशेषता या परिवर्तन लाते हैं। उप (समीप) + सर्ग (रचना) = उपसर्ग। उपसर्ग स्वतंत्र शब्द नहीं होते; इनका अपना कोई अर्थ अकेले नहीं होता, पर ये शब्द के अर्थ को बदल देते हैं।
उदाहरण: हार शब्द के आगे —
- प्र + हार = प्रहार (चोट)
- आ + हार = आहार (भोजन)
- सम् + हार = संहार (विनाश)
- वि + हार = विहार (घूमना)
- परि + हार = परिहार (उपाय/मुक्ति)
- उप + हार = उपहार (भेंट)
उपसर्ग लगने से शब्द के अर्थ में तीन प्रकार के परिवर्तन होते हैं — नया अर्थ, अर्थ का विपरीत हो जाना, या अर्थ में विशेषता आ जाना।
उपसर्ग के भेद
उत्पत्ति के आधार पर उपसर्ग चार प्रकार के हैं:
- संस्कृत के उपसर्ग (22)
- हिंदी के उपसर्ग (13)
- उर्दू (अरबी-फ़ारसी) के उपसर्ग
- अँग्रेज़ी के उपसर्ग और अन्य
संस्कृत के 22 उपसर्ग
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| अति | अधिक, परे | अतिशय, अत्यंत, अतिक्रमण, अत्याचार, अतिथि |
| अधि | ऊपर, श्रेष्ठ | अधिकार, अधिपति, अधिकरण, अधिक, अध्यक्ष |
| अनु | पीछे, समान | अनुकरण, अनुरूप, अनुज, अनुशासन, अनुभव |
| अप | बुरा, विपरीत, दूर | अपमान, अपयश, अपकार, अपशब्द, अपहरण |
| अभि | सामने, ओर, पास | अभिमान, अभिनय, अभिलाषा, अभिवादन, अभ्यास |
| अव | नीचे, हीनता | अवगुण, अवनति, अवसान, अवतार, अवकाश |
| आ | तक, समेत, उलटा | आजन्म, आगमन, आकर्षण, आहार, आरोहण |
| उत्/उद् | ऊपर, श्रेष्ठ | उत्कर्ष, उन्नति, उद्घाटन, उत्पत्ति, उद्योग |
| उप | समीप, गौण | उपकार, उपदेश, उपवन, उपनाम, उपहार |
| दुर्/दुस्/दुः | बुरा, कठिन | दुर्जन, दुर्गम, दुस्साहस, दुष्कर, दुर्दशा |
| निर्/निस्/निः | बिना, बाहर | निर्धन, निर्भय, निश्चल, निराश, निर्मल |
| नि | नीचे, भीतर, निषेध | निवास, निपात, निबंध, निदेश, निवारण |
| परा | उलटा, दूर | पराजय, पराक्रम, परामर्श, पराभव |
| परि | चारों ओर | परिक्रमा, परिवार, परिणाम, परिधि, परिचय |
| प्र | अधिक, आगे | प्रभाव, प्रसिद्ध, प्रकाश, प्रवेश, प्रयोग |
| प्रति | हर, उलटा, सामने | प्रतिदिन, प्रतिकूल, प्रतिनिधि, प्रत्येक, प्रतिबिंब |
| वि | विशेष, विरुद्ध, रहित | विज्ञान, विदेश, विधवा, विशेष, विनाश |
| सम् | अच्छा, साथ, पूर्ण | संयोग, संगम, संसार, संतोष, संपूर्ण |
| सु | अच्छा, सरल | सुयोग, सुजन, सुगम, सुपुत्र, स्वागत |
| अपि | भी, निकटता, ढकना | अपिधान (ढक्कन), अपिहित — (हिंदी में प्रचलन कम) |
संस्कृत के 22 उपसर्गों की सूची (याद रखने के लिए): प्र, परा, अप, सम्, अनु, अव, निस्, निर्, दुस्, दुर्, वि, आ, नि, अधि, अपि, अति, सु, उत्, अभि, प्रति, परि, उप।
"प्र-परा-अप-सम्-अनु-अव, निस्-निर्-दुस्-दुर्-वि-आ-नि, अधि-अपि-अति-सु-उत्-अभि-प्रति-परि-उप" — ये 22 उपसर्ग हैं।
उपसर्गों के संधि से बदलते रूप
कुछ उपसर्ग संधि के कारण बदल जाते हैं: उत् → उद्, उच्, उज्, उन् (उद्घाटन, उच्चारण, उज्ज्वल, उन्नति); सम् → सं (संसार, संयोग); निः → निर्, निश्, निस् (निर्धन, निश्चल, निस्तेज); दुः → दुर्, दुश्, दुस् (दुर्गम, दुश्चरित्र, दुस्साहस); अभि → अभ् (अभ्यास); प्रति → प्रत् (प्रत्येक)।
हिंदी के उपसर्ग (13)
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| अ | निषेध (नहीं) | अज्ञान, अनपढ़, अछूत, अटल, अचल |
| अन | निषेध | अनजान, अनबन, अनहोनी, अनमोल, अनपढ़ |
| अध | आधा | अधपका, अधमरा, अधखिला, अधकचरा |
| उन | एक कम | उन्नीस, उनतीस, उनचास, उनसठ |
| औ | हीन, निषेध | औगुन, औघट, औसर |
| कु | बुरा | कुपुत्र, कुचाल, कुरूप, कुकर्म, कुसंग |
| दु | बुरा, कठिन | दुकाल, दुबला, दुधारू |
| नि | निषेध, रहित | निडर, निकम्मा, निहत्था, निलज्ज |
| पर | दूसरा | परदेस, परलोक, परहित |
| भर | पूरा | भरपेट, भरपूर, भरसक, भरमार |
| सु | अच्छा | सुजान, सुगंध, सुपूत, सुघड़ |
| स | साथ, सहित | सजीव, सफल, सरस, सबल |
| बिन | बिना | बिनब्याहा, बिनखाए |
(कुछ ग्रंथों में अध, उन, औ, कु, दु, नि, पर, भर आदि को अलग गिना जाता है; इनमें से 'कु', 'सु', 'अ' संस्कृत से आए पर हिंदी में भी प्रचलित हैं।)