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समास

समास का अर्थ, समास-विग्रह, पूर्वपद और उत्तरपद; समास के छह भेद — अव्ययीभाव, तत्पुरुष (और उसके भेद — कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण तत्पुरुष; नञ् और कर्मधारय, द्विगु), द्वंद्व, बहुव्रीहि — पहचानने की युक्तियाँ, तुलनात्मक सारणी, उदाहरण और परीक्षा में पूछे जाने वाले शब्द।

📑 Contents (9 sections)

Last reviewed 1 Oct 2026 · 11 min read

समास क्या है?

समास का अर्थ है संक्षेप। जब दो या दो से अधिक शब्द अपने बीच की विभक्तियों (कारक-चिह्नों) और योजक शब्दों को छोड़कर एक नया शब्द बनाते हैं, तो उस मेल को समास कहते हैं और उससे बना शब्द समस्त पद (सामासिक शब्द) कहलाता है।

  • समास-विग्रह — समस्त पद को फिर से खोलकर लिखना: राजपुत्र = राजा का पुत्र।
  • पूर्वपद — पहला खंड; उत्तरपद — दूसरा खंड। जैसे राजपुत्र में राज पूर्वपद और पुत्र उत्तरपद है।
  • समास में पदों के बीच के चिह्न लुप्त हो जाते हैं।
Noteसमास और संधि में अंतर
  • संधि में वर्णों का मेल होता है और विग्रह को 'विच्छेद' कहते हैं; समास में शब्दों (पदों) का मेल होता है और विग्रह होता है।
  • संधि में दो वर्ण ही बदलते हैं; समास में विभक्ति और योजक शब्द लुप्त होते हैं।
  • उदाहरण: विद्यालय = विद्या + आलय (संधि); विद्यालय = विद्या का आलय (समास, तत्पुरुष) — एक ही शब्द दोनों रूपों में समझा जा सकता है।

समास के छह भेद

भेद प्रधान पद उदाहरण
अव्ययीभाव पूर्वपद प्रधान (अव्यय) यथाशक्ति, प्रतिदिन
तत्पुरुष उत्तरपद प्रधान राजपुत्र, गंगाजल
कर्मधारय उत्तरपद प्रधान (विशेषण–विशेष्य / उपमान–उपमेय) नीलकमल, चरणकमल
द्विगु उत्तरपद प्रधान (पूर्वपद संख्या) त्रिलोक, नवरात्र
द्वंद्व दोनों पद प्रधान माता-पिता, राधा-कृष्ण
बहुव्रीहि कोई तीसरा पद (अन्य अर्थ) प्रधान लंबोदर, नीलकंठ

(कभी-कभी कर्मधारय और द्विगु को तत्पुरुष का ही उपभेद माना जाता है; ऐसे में चार भेद — अव्ययीभाव, तत्पुरुष, द्वंद्व, बहुव्रीहि — बताए जाते हैं। प्रश्न में दिए विकल्पों को देखकर उत्तर दें।)

1. अव्ययीभाव समास

जिसमें पूर्वपद अव्यय (उपसर्ग या अव्यय शब्द) हो और समस्त पद अव्यय की तरह काम करे (उसका रूप कभी नहीं बदलता)।

समस्त पद विग्रह पूर्वपद
यथाशक्ति शक्ति के अनुसार यथा
प्रतिदिन हर दिन प्रति
आजन्म जन्म से लेकर आ
आमरण मृत्यु तक आ
भरपेट पेट भरकर भर
बेकाम बिना काम के बे
निडर बिना डर के नि
यथासंभव जितना संभव हो यथा
अनुरूप रूप के अनुसार अनु
प्रत्येक हर एक प्रति
रातोंरात रात ही रात में (पुनरुक्त)
हाथोंहाथ हाथ ही हाथ में (पुनरुक्त)
बीचोंबीच ठीक बीच में
घर-घर हर घर में (पुनरुक्त)
आजीवन जीवन भर आ
यथाविधि विधि के अनुसार यथा
अनजाने बिना जाने अन
भरसक शक्ति भर भर

पहचान: पूर्वपद यथा, प्रति, आ, बे, अनु, भर, उप, परि, अधि जैसे अव्यय हों; पुनरुक्त शब्द (घर-घर, दिन-दिन) में 'ही' या 'में' का भाव हो; समस्त पद क्रिया-विशेषण की तरह प्रयुक्त हो।

2. तत्पुरुष समास

जिसमें उत्तरपद प्रधान हो और पूर्वपद और उत्तरपद के बीच कारक-चिह्न (विभक्ति) लुप्त हो। समस्त पद में लिंग-वचन उत्तरपद के अनुसार होता है।

भेद — कारक के आधार पर छह:

भेद लुप्त विभक्ति उदाहरण (विग्रह)
कर्म तत्पुरुष को गृहागत = गृह को आगत; ग्रामगत = ग्राम को गया हुआ; स्वर्गप्राप्त = स्वर्ग को प्राप्त; यशप्राप्त = यश को प्राप्त; जेबकतरा = जेब को कतरने वाला
करण तत्पुरुष से, के द्वारा रेखांकित = रेखा से अंकित; तुलसीकृत = तुलसी द्वारा कृत; शोकग्रस्त = शोक से ग्रस्त; मनचाहा = मन से चाहा; हस्तलिखित = हाथ से लिखित; ईश्वरदत्त = ईश्वर द्वारा दिया हुआ; भुखमरा = भूख से मरा
संप्रदान तत्पुरुष के लिए रसोईघर = रसोई के लिए घर; विद्यालय = विद्या के लिए आलय; हथकड़ी = हाथ के लिए कड़ी; देशभक्ति = देश के लिए भक्ति; पुस्तकालय = पुस्तकों के लिए आलय; डाकगाड़ी = डाक के लिए गाड़ी
अपादान तत्पुरुष से (अलग होने के अर्थ में) देशनिकाला = देश से निकाला; पथभ्रष्ट = पथ से भ्रष्ट; ऋणमुक्त = ऋण से मुक्त; पदच्युत = पद से च्युत; जन्मांध = जन्म से अंधा; धर्मविमुख = धर्म से विमुख
संबंध तत्पुरुष का, के, की राजपुत्र = राजा का पुत्र; गंगाजल = गंगा का जल; राष्ट्रपति = राष्ट्र का पति; विद्यासागर = विद्या का सागर; देवालय = देव का आलय; प्रेमसागर = प्रेम का सागर
अधिकरण तत्पुरुष में, पर आपबीती = अपने पर बीती; नगरवास = नगर में वास; कविश्रेष्ठ = कवियों में श्रेष्ठ; शोकमग्न = शोक में मग्न; घुड़सवार = घोड़े पर सवार; सर्वोत्तम = सब में उत्तम; पुरुषोत्तम = पुरुषों में उत्तम; दानवीर = दान में वीर

तत्पुरुष के अन्य भेद

  • नञ् तत्पुरुष — पूर्वपद 'न' (निषेध) के अर्थ में (अ, अन्, ना, गैर, बे): अधर्म = न धर्म; अनंत = न अंत; अनादि = न आदि; असंभव = न संभव; अनपढ़ = न पढ़ा; नापसंद = न पसंद; गैरकानूनी = न कानूनी; अमर = न मर।
  • लुप्तपद तत्पुरुष (उपपद) — बीच का कोई शब्द लुप्त: दहीबड़ा = दही में डूबा हुआ बड़ा; पर्णशाला = पर्ण से बनी शाला; गोबरगणेश = गोबर से बना गणेश; वनमानुष = वन में रहने वाला मानुष।
  • उपपद तत्पुरुष — उत्तरपद क्रिया से बना हो: जलज = जल में जन्मा; पंकज = पंक में जन्मा; ग्रंथकार = ग्रंथ को रचने वाला; चित्रकार; कुंभकार; गिरिधर = गिरि को धारण करने वाला; पाठक।
  • प्रादि तत्पुरुष — पूर्वपद उपसर्ग (प्र, वि, दुः, सु...): प्राचार्य = प्रमुख आचार्य; सुपुत्र; कुपुत्र।

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