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राजस्थान का राजनीतिक जनजागरण एवं विकास — महिलाओं के विशेष संदर्भ में

राजस्थान में राजनीतिक चेतना का क्रमिक विकास (1857 के बाद से स्वतंत्रता तक) — आर्य समाज, राजपूताना मध्य भारत सभा, राजस्थान सेवा संघ, देशी राज्य लोक परिषद, प्रजामंडल; स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका (किशोरी देवी, अंजना देवी चौधरी, नारायणी देवी वर्मा, रतन शास्त्री, कालीबाई आदि), महिला शिक्षा और सशक्तीकरण, स्वतंत्रता के बाद महिला राजनीति (पंचायती राज में 50 % आरक्षण, पहली महिला मुख्यमंत्री/अध्यक्ष), महिला आयोग और परीक्षा-उपयोगी तथ्य।

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Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read

ध्यान दें। नाम और तिथियाँ स्रोतों में थोड़ी भिन्न मिलती हैं। नीचे के तथ्य परीक्षा में प्रचलित हैं; पदों और आरक्षण के नवीनतम नियम सरकारी अधिसूचना से देख लें।

राजनीतिक जनजागरण — पृष्ठभूमि

राजस्थान की रियासतों में अंग्रेजों के संरक्षण में राजाओं की निरंकुश सत्ता थी, जबकि ब्रिटिश भारत में राष्ट्रीय आंदोलन तेज हो रहा था। रियासतों की जनता में चेतना धीरे-धीरे आई।

प्रमुख चरण

चरण घटनाएँ
1857 का विद्रोह नसीराबाद, एरिनपुरा, आउवा, कोटा में सैनिक-जागीरदार विद्रोह; जन-चेतना का प्रारंभिक संकेत
आर्य समाज और समाज-सुधार (19वीं सदी का उत्तरार्ध) स्वामी दयानंद का राजस्थान में प्रवास (उदयपुर, जोधपुर); शिक्षा, स्त्री-शिक्षा और कुरीतियों (बाल विवाह, पर्दा, मृत्युभोज) के विरुद्ध प्रचार
बीसवीं सदी का आरंभ क्रांतिकारी आंदोलन — बारहठ परिवार, अर्जुनलाल सेठी; वर्धमान विद्यालय (जयपुर)
1915–1920 बिजौलिया किसान आंदोलन (पथिक का नेतृत्व); राजपूताना मध्य भारत सभा (1918) — दिल्ली अधिवेशन; राजस्थान सेवा संघ (1919, वर्धा) — बाद में अजमेर
1920 का दशक बेगूं, बरड़, नीमूचणा आदि किसान आंदोलन; सेवा संघ का राजनीतिक जागरण में योगदान
1927 अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद — रियासतों के लोगों के राजनीतिक अधिकारों के लिए
1930 के दशक प्रजामंडल/प्रजा परिषद (जयपुर 1931, बीकानेर 1936, मारवाड़ 1938, मेवाड़ 1938 आदि)
1938 हरिपुरा कांग्रेस — रियासतों में आंदोलन की नीति पर स्पष्टता; राजस्थान में प्रजामंडल सक्रिय
1942 भारत छोड़ो आंदोलन — राजस्थान में भी गिरफ्तारियाँ और आंदोलन
1946–47 उत्तरदायी शासन की माँग, डूंगरपुर-बाँसवाड़ा के आंदोलन; कालीबाई का बलिदान (1947); एकीकरण की प्रक्रिया

स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका

प्रमुख महिलाएँ

नाम क्षेत्र/योगदान
किशोरी देवी सीकर (शेखावाटी) — 1934 के कटराथल महिला सम्मेलन की अध्यक्ष; किसान आंदोलन में महिलाओं को जोड़ा; उत्तमा देवी सहयोगी
अंजना देवी चौधरी जयपुर — जयपुर प्रजामंडल में सक्रिय; रामनारायण चौधरी की पत्नी; सत्याग्रह में भाग; जेल यात्रा
नारायणी देवी वर्मा माणिक्य लाल वर्मा की पत्नी; मेवाड़ प्रजामंडल और भीलवाड़ा में सक्रिय
रतन शास्त्री वनस्थली विद्यापीठ (टोंक) — हीरालाल शास्त्री की पत्नी; महिला शिक्षा और राजनीतिक जागरण
कालीबाई (1935–1947) डूंगरपुर — रास्तापाल (डूंगरपुर) की 13 वर्षीय भील बालिका; 19 जून 1947 को विद्यालय बचाने के आंदोलन में शहीद; "वीर बाला"
महारानी गायत्री देवी (जयपुर) स्वतंत्रता के बाद सांसद (1962 से)

महिलाओं की गतिविधियाँ

  • सत्याग्रह, जुलूस, धरने, चरखा-खादी प्रचार।
  • किसान आंदोलनों में भागीदारी (शेखावाटी, बिजौलिया)।
  • शिक्षा के प्रसार में योगदान — वनस्थली, अजमेर, हटूंडी।
  • सामाजिक कुरीतियों (पर्दा, बाल विवाह) के विरुद्ध महिला सम्मेलन — सीकर 1934।
  • जेल यात्राएँ — 1942 के आंदोलन में।

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