Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 7 min read
ध्यान दें। तिथियाँ और उत्खननकर्ताओं के नाम अलग-अलग पुस्तकों में थोड़े भिन्न मिलते हैं। यहाँ वे तथ्य दिए गए हैं जो प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्यतः स्वीकार किए जाते हैं; जहाँ मतभेद है वहाँ "माना जाता है" लिखा गया है।
इतिहास के स्रोत — वर्गीकरण
किसी क्षेत्र का इतिहास पुरातात्विक, साहित्यिक, पुरालेखीय, मुद्रा-संबंधी और विदेशी विवरणों के आधार पर लिखा जाता है। राजस्थान में पाषाण युग से लेकर रियासतों के काल तक के साक्ष्य मिलते हैं।
| वर्ग | उदाहरण |
|---|---|
| पुरातात्विक | उत्खनित स्थल, मृद्भांड, औजार, भवन, मूर्तियाँ |
| अभिलेख (शिलालेख, ताम्रपत्र) | घोसुंडी, नांदसा, बिजौलिया, राज प्रशस्ति |
| सिक्के | कुषाण, यौधेय, मालव सिक्के; रियासती सिक्के |
| साहित्यिक | पृथ्वीराज रासो, नैणसी री ख्यात, वीर विनोद, वंश भास्कर |
| विदेशी विवरण | ह्वेनसांग, अलबरूनी, टॉड, अबुल फज़ल का आइन-ए-अकबरी |
| पुरालेख (अभिलेखागार) | बहियाँ, पट्टे-परवाने, खरीते, फरमान |
"राजस्थान" नाम का इतिहास
- माना जाता है कि "राजस्थानीय" शब्द का सबसे पुराना प्रयोग वसंतगढ़ (सिरोही) के लगभग 625 ई. के शिलालेख में मिलता है।
- मध्यकाल में इस क्षेत्र के लिए "रायथान" शब्द प्रचलित रहा।
- जॉर्ज थॉमस (1800 ई.) ने इसे "राजपूताना" कहा; कर्नल जेम्स टॉड ने अपने ग्रंथ में इसे "राजस्थान" तथा "रायथान" कहा।
- स्वतंत्रता के बाद 30 मार्च 1949 को वृहद् राजस्थान बना; 1 नवंबर 1956 को वर्तमान स्वरूप मिला।
पुरातात्विक स्रोत
प्रमुख उत्खनित स्थल
| स्थल | ज़िला / नदी | महत्व |
|---|---|---|
| कालीबंगा | हनुमानगढ़ (घग्घर, प्राचीन सरस्वती-दृषद्वती क्षेत्र) | हड़प्पा सभ्यता का प्रमुख केंद्र; जुते हुए खेत, अग्निकुंड/हवन वेदियाँ, दो टीले (गढ़ी व निचला नगर); "काले रंग की चूड़ियाँ" (अर्थ: कालीबंगा); पहली पहचान अमलानंद घोष (1952); बड़ा उत्खनन बी.बी. लाल और बी.के. थापर (1961–69) |
| आहड़ (आयड़) | उदयपुर (आयड़/बेड़च नदी) | ताम्रयुगीन संस्कृति; "ताम्रवती नगरी"; मकान पत्थर के; बड़े भंडारण पात्र (गोरे व कोठे); उत्खनन में अक्षय कीर्ति व्यास, आर.सी. अग्रवाल, एच.डी. सांकलिया के नाम जुड़े हैं |
| गिलूंड | राजसमंद (बनास) | आहड़ संस्कृति का स्थल; पक्की ईंटों के प्रयोग के साक्ष्य; उत्खनन बी.बी. लाल (1959–60) |
| बागोर | भीलवाड़ा (कोठारी नदी) | पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्यों में गिना जाता है; मध्यपाषाण संस्कृति; उत्खनन वी.एन. मिश्र (1960 के दशक) |
| गणेश्वर | सीकर (कांतली नदी) | ताम्र-संस्कृति का केंद्र, "ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी" कहा जाता है; तांबे के औजार व तीर; खोज रतनचंद्र अग्रवाल (1970 के दशक) |
| बैराठ (विराटनगर) | जयपुर | मौर्यकाल; अशोक का भाब्रू (बैराठ) शिलालेख (अब कोलकाता में); बौद्ध मंदिर के अवशेष; महाभारतकालीन विराट की राजधानी माना जाता है; खोज दयाराम साहनी |
| नगर (कर्कोट नगर) | टोंक | मालव जनपद की राजधानी; मालवों के सिक्के |
| रंगमहल | हनुमानगढ़ (घग्घर) | कुषाणकालीन मृणमूर्तियाँ व सिक्के |
| सुनारी | झुंझुनूँ | लोहे के प्रयोग के प्राचीन साक्ष्य |
| जोधपुरा | जयपुर | लौह-पूर्व व शुंग-कुषाणकालीन अवशेष |
| नगरी (माध्यमिका) | चित्तौड़गढ़ | शिबि जनपद की राजधानी; पाषाण निर्मित अवशेष |
| ओझियाना | भीलवाड़ा | आहड़-जैसी संस्कृति के साक्ष्य |
| तिलवाड़ा | बाड़मेर (लूनी) | मध्यपाषाण-ताम्र पाषाण साक्ष्य |
परीक्षा सूत्र: हड़प्पा → कालीबंगा; ताम्र → आहड़ व गणेश्वर; पशुपालन → बागोर; मौर्य/बौद्ध → बैराठ; लोहा → सुनारी।
कालीबंगा के प्रमुख तथ्य
- जुते हुए खेत का प्राचीनतम साक्ष्य (प्री-हड़प्पा स्तर) — दो फसलें एक साथ बोने की पद्धति।
- सात अग्निवेदियाँ, पक्के मकानों के स्थान पर कच्ची ईंटें; पक्की ईंट का नालियों व कुओं में प्रयोग।
- मुहरें व मुद्राएँ मिलीं; लिपि अभी तक अपठित।
- पूर्व-हड़प्पा और हड़प्पा, दोनों स्तर।