Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read
ध्यान दें। क्षेत्रफल/प्रतिशत के आँकड़े पुस्तकों में थोड़े भिन्न मिलते हैं। नीचे के आँकड़े सर्वाधिक प्रचलित हैं।
थार मरुस्थल — परिचय
- अरावली के पश्चिम में फैला राजस्थान का सबसे बड़ा भौतिक विभाग — राज्य के क्षेत्रफल का लगभग 61 % और जनसंख्या का लगभग 40 %।
- राजस्थान के लगभग 12 जिले पूर्णतः या अंशतः इस प्रदेश में आते हैं (जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, चूरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, नागौर, जालौर, पाली, सीकर, झुंझुनूँ)।
- थार विश्व के सर्वाधिक जनसंख्या वाले मरुस्थलों में गिना जाता है।
- भारत में थार का विस्तार राजस्थान के अतिरिक्त पंजाब, हरियाणा, गुजरात में है; पाकिस्तान में थारपारकर के रूप में।
- उत्पत्ति: माना जाता है कि अतीत में यह क्षेत्र टेथिस सागर के नीचे था; बाद में समुद्र हटने, घग्घर-सरस्वती जैसी नदियों के सूखने और जलवायु-परिवर्तन से मरुस्थल बना।
विभाजन — शुष्क और अर्द्ध-शुष्क
| भाग | वर्षा | जिले | विशेषता |
|---|---|---|---|
| शुष्क (रेतीला शुष्क) | 25 सेमी से कम | जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर (पश्चिमी), श्रीगंगानगर (भाग) | विशाल बालुका स्तूप; वास्तविक थार; सर्वाधिक शुष्क जैसलमेर |
| अर्द्ध-शुष्क (रेतीला मैदान) | 25 से 50 सेमी | चूरू, नागौर, सीकर, झुंझुनूँ, जालौर, पाली | बालू के टीले कम; लूणी बेसिन, शेखावाटी, नागौरी उच्च भूमि |
25 सेमी की समवर्षा रेखा इन दोनों को अलग करती है; इसके पश्चिम में शुष्क, पूर्व में अर्द्ध-शुष्क।
उप-क्षेत्र
| उप-क्षेत्र | विस्तार | विशेषता |
|---|---|---|
| थली (थार का केंद्र) | जैसलमेर, बीकानेर, चूरू (उत्तर-पश्चिम) | बालू के ऊँचे टीले; अत्यधिक शुष्क |
| शेखावाटी | सीकर, झुंझुनूँ, चूरू का भाग | बालू के टीले; कांतली नदी; आंतरिक अपवाह; बरखान |
| नागौरी उच्च भूमि | नागौर, अजमेर का भाग | नागौर, डीडवाना की खारी झीलें; बड़े प्लाया |
| मारवाड़ का मैदान (लूणी बेसिन) | जोधपुर, पाली, जालौर, बाड़मेर (पूर्वी) | लूणी नदी बेसिन; अपेक्षाकृत उपजाऊ; गोडवाड़ क्षेत्र |
| घग्घर का मैदान | श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ | घग्घर (मृत नदी) का बाढ़ का मैदान; इंदिरा गांधी नहर से सिंचित; उपजाऊ |
| लाठी सीरीज | जैसलमेर–पोकरण (लगभग 60 किमी की पट्टी) | भूमिगत जल का भंडार (प्राचीन जलोढ़ चट्टानें); सेवण घास — यह पशु चारे के लिए प्रसिद्ध |
बालुका स्तूप (टीले)
हवा द्वारा बनाए गए रेत के टीले पवन की दिशा, गति और बालू की उपलब्धता के अनुसार अनेक रूप लेते हैं:
| प्रकार | विवरण |
|---|---|
| बरखान (अर्द्धचंद्राकार) | अर्द्धचंद्र की आकृति; पवन की दिशा में सींग; सर्वाधिक गतिशील; जैसलमेर, बीकानेर, चूरू, सीकर, झुंझुनूँ में |
| अनुदैर्ध्य (रेखीय/सीफ) | पवन की दिशा के समानांतर लंबे टीले; जैसलमेर, बाड़मेर में |
| अनुप्रस्थ टीले | पवन के लंबवत् |
| पैराबोलिक | पवन-विमुख परवलयाकार |
| तारा-आकृति (स्टार) | अनेक दिशाओं से पवन से बने |
| सर्वाधिक टीले | जैसलमेर (विशेषकर सम में) |
- बालू के टीलों की ऊँचाई कुछ मीटर से लेकर 100 मीटर से अधिक तक।
- सम (जैसलमेर) और खुहड़ी — मरु-महोत्सव और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध।
- मरु महोत्सव — जैसलमेर (फरवरी, पूर्णिमा से पूर्व)।