Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 6 min read
ध्यान दें। नदियों की लंबाई के आँकड़े पुस्तकों में भिन्न मिलते हैं; यहाँ वे ही आँकड़े दिए गए हैं जिन पर प्रायः सहमति है।
अपवाह तन्त्र का वर्गीकरण
राजस्थान की अधिकांश नदियाँ मौसमी (ऋतुनिष्ठ) हैं; केवल चंबल सदानीरा है। अरावली राज्य का प्रमुख जल-विभाजक है।
| अपवाह | क्षेत्रफल में हिस्सा (लगभग) | नदियाँ |
|---|---|---|
| बंगाल की खाड़ी का अपवाह | लगभग 23 % | चंबल, बनास, बाणगंगा, पार्वती, कालीसिंध, परवन, मेज, बेड़च, कोठारी, खारी, मोरेल, ढील आदि |
| अरब सागर का अपवाह | लगभग 17 % | लूणी, माही, साबरमती, पश्चिमी बनास, सोम, जाखम, सुकड़ी, जवाई आदि |
| आंतरिक अपवाह | लगभग 60 % | घग्घर, काँतली, साबी, रूपारेल, काकनी (मसूरदी) आदि — जो समुद्र तक नहीं पहुँचतीं |
1. बंगाल की खाड़ी का अपवाह
चंबल नदी
- उद्गम: जानापाव पहाड़ी (महू के निकट, इंदौर, मध्य प्रदेश); प्राचीन नाम चर्मण्वती।
- मार्ग: मध्य प्रदेश से बहकर चित्तौड़गढ़ में राजस्थान में प्रवेश; कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर जिलों से; आगे मध्य प्रदेश-राजस्थान और मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश की सीमा बनाती हुई यमुना (इटावा, उत्तर प्रदेश) में मिलती है।
- विशेषता: राजस्थान की एकमात्र सदानीरा (बारहमासी) बड़ी नदी; बीहड़ों का निर्माण; अंतर्राज्यीय सीमा बनाने वाली।
- सहायक: बनास, कालीसिंध, पार्वती, परवन, बामनी, आहू, मेज, कुराल।
- बाँध: गांधी सागर (म.प्र.), राणा प्रताप सागर (चित्तौड़गढ़), जवाहर सागर (कोटा-बूंदी), कोटा बैराज — चंबल घाटी परियोजना।
- राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य इसी के किनारे।
बनास नदी
- उद्गम: खमनौर की पहाड़ियाँ (कुंभलगढ़, राजसमंद)।
- मार्ग: राजसमंद, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, टोंक, सवाई माधोपुर; रामेश्वर (सवाई माधोपुर) में चंबल से मिलती है (यहाँ चंबल, बनास और सीप का संगम)।
- विशेषता: राजस्थान में पूर्णतः बहने वाली सबसे लंबी नदी (लगभग 480 किमी); उपनाम "वन की आशा"।
- सहायक: बेड़च, कोठारी, खारी, मेनाल, मोरेल, ढील, कालीसिल।
- बीसलपुर बाँध (टोंक) — जयपुर, अजमेर, टोंक को जल आपूर्ति।
पार्वती, कालीसिंध, परवन
- पार्वती: उद्गम मध्य प्रदेश (विंध्य, सीहोर); बारां से बहती हुई चंबल में।
- कालीसिंध: मध्य प्रदेश (देवास) से; झालावाड़, बारां, कोटा; चंबल में।
- परवन: मध्य प्रदेश; झालावाड़, बारां; कालीसिंध में।
बाणगंगा और गंभीर
- बाणगंगा ("अर्जुन की गंगा"): उद्गम जयपुर (बैराठ पहाड़ियाँ); जयपुर, दौसा, भरतपुर; अंत में यमुना (आगरा-फतेहपुर सीकरी के निकट)।
- गंभीर: उद्गम करौली की पहाड़ियाँ; भरतपुर से; केवलादेव को जल।
- रूपारेल: उद्गम थानागाजी (अलवर); भरतपुर।
2. अरब सागर का अपवाह
लूणी नदी
- उद्गम: नाग पहाड़ी (अजमेर) — सागरमती और सरस्वती के संगम से लूणी बनती है।
- मार्ग: अजमेर → पाली → जोधपुर → बाड़मेर → जालौर; अंत में कच्छ के रन में विलीन। लंबाई लगभग 495 किमी।
- विशेषता: मरुस्थल की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी; पाली-बाड़मेर में बालोतरा तक जल मीठा, फिर खारा हो जाता है ("आधी मीठी, आधी खारी"); प्राचीन नाम लवणवती।
- सहायक: जवाई, सुकड़ी, बाँडी, खारी, लीलड़ी, गुहिया, सागी, जोजड़ी; इनमें जोजड़ी अरावली से नहीं निकलती।
- बाँध: जवाई बाँध (पाली; "मारवाड़ का अमृत सरोवर"), सरदार समंद (पाली)।
माही नदी
- उद्गम: मेहद झील (धार, मध्य प्रदेश, विंध्याचल)।
- मार्ग: बाँसवाड़ा से राजस्थान में प्रवेश; बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़; गुजरात में खंभात की खाड़ी।
- विशेषता: कर्क रेखा को दो बार काटने वाली एकमात्र नदी; उपनाम "वागड़ की गंगा" और "कांठल की गंगा"; लंबाई लगभग 576 किमी।
- सहायक: सोम, जाखम, अनास, मोरन, कागदी।
- बाँध: माही बजाज सागर (बाँसवाड़ा), कागदी पिकअप, कडाना (गुजरात)।
साबरमती
- उद्गम उदयपुर के अरावली क्षेत्र (कोटड़ा के निकट); उदयपुर, सिरोही; गुजरात में खंभात की खाड़ी।
- सहायक: वाकल, सेई (सेई परियोजना — उदयपुर)।
अन्य
- पश्चिमी बनास (सिरोही का सिरोही-आबू क्षेत्र) — कच्छ के रन में।
- सोम नदी — उदयपुर (बीछामेड़ा पहाड़ियाँ) से; डूंगरपुर में माही में।