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राजस्थानी भाषा, साहित्य की प्रमुख कृतियां एवं क्षेत्रीय बोलियां

राजस्थानी भाषा का विकास और लिपि, मुख्य बोलियाँ (मारवाड़ी, ढूँढाड़ी, हाड़ौती, मेवाड़ी, वागड़ी, मेवाती, शेखावाटी, मालवी, अहीरवाटी आदि) और उनके क्षेत्र, साहित्य की धाराएँ (चारण, जैन, संत-भक्ति, लोक साहित्य), प्रमुख कृतियाँ और रचनाकार (पृथ्वीराज रासो, ढोला मारू रा दूहा, वचनिका, वेलि क्रिसन रुक्मणी री, वंश भास्कर, आधुनिक साहित्यकार), अकादमियाँ और पुरस्कार।

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Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read

ध्यान दें। बोलियों के क्षेत्र और ग्रंथों के रचनाकाल के बारे में विद्वानों में मतभेद हैं। नीचे परीक्षा-स्वीकृत तथ्य हैं। राजस्थानी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की माँग लंबे समय से है (नवीनतम स्थिति देखें)।

राजस्थानी भाषा

  • राजस्थानी उत्तर-पश्चिमी भारत की इंडो-आर्य भाषा है, जो शौरसेनी अपभ्रंश → नागर अपभ्रंश से विकसित मानी जाती है (जॉर्ज ग्रियर्सन: Linguistic Survey of India)।
  • लिपि: देवनागरी; पुरानी महाजनी (मुड़िया) लिपि का भी प्रयोग।
  • प्राचीन नाम: मरुभाषा, मरुवाणी; डिंगल (चारण साहित्य की साहित्यिक रूप) और पिंगल (ब्रज-मिश्रित काव्य-भाषा)।
  • भाषा का काल: 13वीं–14वीं सदी से साहित्य।
  • राजस्थान की राजभाषा: हिंदी; राजस्थानी को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की माँग है।
  • ग्रियर्सन ने राजस्थानी को पश्चिमी (मारवाड़ी), पूर्वी (ढूँढाड़ी), उत्तरी (मेवाती), दक्षिणी (मालवी) आदि वर्गों में बाँटा।

प्रमुख बोलियाँ

बोली क्षेत्र विशेषता
मारवाड़ी जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, पाली, नागौर, बाड़मेर, जालौर, सिरोही सबसे अधिक बोली जाने वाली और साहित्यिक बोली; डिंगल इसी का साहित्यिक रूप; "राजस्थान की मानक बोली" कही जाती है
ढूँढाड़ी (जयपुरी) जयपुर, दौसा, टोंक, अजमेर (भाग) कछवाहा क्षेत्र; दादू पंथ का साहित्य; उप-बोलियाँ — तोरावाटी, कठेड़ी, चौरासी, नागरचोल, राजावाटी
हाड़ौती कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ हाड़ा चौहान क्षेत्र; ढूँढाड़ी से निकटता
मेवाड़ी उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा महाराणा कुंभा के काल में साहित्य; मारवाड़ी से मिलती
वागड़ी डूंगरपुर, बाँसवाड़ा भीली और गुजराती से प्रभावित
मेवाती अलवर, भरतपुर मेव समाज; हरियाणवी/ब्रज से प्रभावित
शेखावाटी सीकर, झुंझुनूँ, चूरू मारवाड़ी और ढूँढाड़ी का मिश्रण
मालवी झालावाड़ (भाग), प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़ का दक्षिणी भाग मालवा से संबंधित
अहीरवाटी (राठी) अलवर का दक्षिण-पश्चिमी भाग (बहरोड़, कोटपूतली) अहीर क्षेत्र; हरियाणवी से मिलती
ब्रज भरतपुर, धौलपुर, करौली ब्रज भाषा (पूर्वी राजस्थान)
भीली दक्षिणी राजस्थान भील जनजाति की भाषा

राजस्थानी साहित्य की धाराएँ

1. चारण/डिंगल साहित्य (वीर रस)

  • चारण, भाट, बारहठ कवियों द्वारा; युद्ध, वीरता, प्रशस्ति।
  • प्रमुख कृतियाँ:
    • पृथ्वीराज रासो — चंदबरदाई (हिंदी का प्रथम महाकाव्य कहा जाता है)।
    • खुमाण रासो — दलपति विजय (मेवाड़)।
    • बीसलदेव रासो — नरपति नाल्ह (प्रेम/वीर)।
    • हम्मीर रासो — जोधराज।
    • कान्हड़दे प्रबंध — पद्मनाभ (जालौर)।
    • वेलि क्रिसन रुक्मणी री — पृथ्वीराज राठौड़ (बीकानेर) — "पीथल"; डिंगल की श्रेष्ठ रचना; दुरसा आढ़ा ने इसे "पाँचवाँ वेद" और "19वाँ पुराण" कहा (प्रचलित कथन)।
    • अचलदास खींची री वचनिका — शिवदास गाडण (गद्य-पद्य मिश्रित "वचनिका")।
    • राठौड़ रतनसिंह महेसदासोत री वचनिका — खिड़िया जगा।
    • वंश भास्कर — सूर्यमल्ल मिश्रण (बूंदी) — बूंदी के हाड़ा वंश का इतिहास; वीर सतसई; "आधुनिक राजस्थानी साहित्य के पुरोधा"।
    • ढोला-मारू रा दूहा — कवि कल्लोल (लोक-प्रेम काव्य); ढोला और मारू की प्रेम कथा; 'दोहों' का संग्रह।
    • राजरूपक — वीरभान।
    • कृपाराम — राजिया रा सोरठा (नीति)।
    • दुरसा आढ़ा — "राव सुरताण" आदि।
  • प्रसिद्ध चारण कवि: बाँकीदास आशिया (बाँकीदास री ख्यात), करणीदान, दुरसा आढ़ा, केसरी सिंह बारहठ।

2. जैन साहित्य

  • जैन साधुओं द्वारा रास, कथाएँ, काव्य।
  • भरतेश्वर बाहुबली रास — शालिभद्र सूरि (1184); हम्मीर महाकाव्य — नयनचंद्र सूरि; जिनदत्त सूरि, हेमचंद्राचार्य (गुजरात से संबद्ध)।

3. संत और भक्ति साहित्य

  • दादू वाणी (दादू दयाल), मीरां की पदावली, जाम्भोजी की वाणी (शब्दवाणी), रामस्नेही संतों की वाणी, जसनाथजी की वाणी, सुंदरदास का सुंदर-विलास।
  • निर्गुण और सगुण दोनों धाराएँ।

4. लोक साहित्य

  • लोकगीत (पणिहारी, मूमल, कुरजां, घूमर, बन्ना-बन्नी), लोकगाथाएँ (पाबूजी, देवनारायण की फड़), पहेलियाँ, कहावतें, लोककथाएँ (विजयदान देथा की "बातां री फुलवाड़ी")।
  • लोकनाट्य — ख्याल, रम्मत, तमाशा, गवरी।

5. आधुनिक राजस्थानी साहित्य

रचनाकार रचना/योगदान
सूर्यमल्ल मिश्रण वंश भास्कर, वीर सतसई — आधुनिक काल के पथ-प्रदर्शक
कन्हैयालाल सेठिया पाथल और पीथल, धरती धोरां री, लीलटांस; पद्म श्री; "धरती धोरां री" लोकप्रिय गीत
विजयदान देथा (बिज्जी) बातां री फुलवाड़ी; साहित्य अकादमी पुरस्कार; पद्म श्री; "दुविधा" पर फिल्म
मेघराज मुकुल सेनाणी
नानूराम संस्कर्ता भाषा-शास्त्री
सीताराम लालस "राजस्थानी सबदकोश" (राजस्थानी-हिंदी शब्दकोश)
चन्द्रसिंह बिरकाळी बादळी (वर्षा-कविता), लू
नारायण सिंह भाटी परंपरा-आधुनिकता के कवि (राजस्थानी कविता)

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