Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read
ध्यान दें। तिथियाँ और स्थान-संबंध पुस्तकों में थोड़े भिन्न मिल सकते हैं। यहाँ परीक्षा में प्रचलित स्थापित तथ्य हैं। पानीपत, खानवा और तराइन जैसे युद्ध-स्थल उत्तर प्रदेश में नहीं हैं (क्रमशः हरियाणा, राजस्थान, हरियाणा)।
प्रागैतिहासिक स्थल
| स्थल | जिला / क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|
| बेलन घाटी | प्रयागराज–मिर्जापुर | पुरापाषाण से नवपाषाण काल तक की क्रमिक संस्कृति का क्षेत्र |
| कोल्डिहवा | प्रयागराज | चावल की खेती के प्राचीन साक्ष्य (नवपाषाण) |
| लहुरादेव | संत कबीर नगर | चावल की खेती के बहुत प्राचीन प्रमाण (ताम्र-पाषाण से पूर्व) |
| सराय नाहर राय | प्रतापगढ़ | मध्यपाषाण काल, मानव कंकाल/समाधियाँ |
| आलमगीरपुर | मेरठ (हिंडन नदी) | हड़प्पा सभ्यता का सबसे पूर्वी स्थल |
| हस्तिनापुर | मेरठ | चित्रित धूसर मृद्भांड (PGW) संस्कृति; महाभारत परंपरा से जुड़ा |
| अतरंजीखेड़ा | एटा | लौह उपकरणों के प्रारंभिक साक्ष्य; PGW संस्कृति |
| कौशाम्बी | प्रयागराज के निकट | उत्खनन — वत्स राज्य की राजधानी |
महाजनपद काल (छठी शताब्दी ई.पू.)
उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में स्थित प्रमुख महाजनपद:
| महाजनपद | राजधानी / स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| काशी | वाराणसी | प्राचीन शिक्षा-धार्मिक केंद्र; बाद में कोसल में मिला |
| कोसल | श्रावस्ती, अयोध्या (साकेत) | राजा प्रसेनजित; बुद्ध के समकालीन; बाद में मगध में मिला |
| वत्स | कौशाम्बी | राजा उदयन |
| पांचाल | अहिच्छत्र (बरेली), कांपिल्य (फर्रुखाबाद) | उत्तर और दक्षिण पांचाल |
| शूरसेन | मथुरा | कृष्ण परंपरा |
| मल्ल | कुशीनगर, पावा | गणराज्य |
| कुरु | इन्द्रप्रस्थ, हस्तिनापुर | आंशिक रूप से उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग में |
बौद्ध और जैन केंद्र
| स्थान | महत्त्व |
|---|---|
| सारनाथ (वाराणसी) | बुद्ध का प्रथम उपदेश (धर्मचक्र प्रवर्तन); अशोक का सिंह-शीर्ष स्तंभ (भारत का राष्ट्रीय चिह्न) यहीं से मिला |
| कुशीनगर (कुशीनगर जिला) | महापरिनिर्वाण स्थल |
| श्रावस्ती | बुद्ध ने सर्वाधिक वर्षावास यहीं बिताए; जेतवन विहार |
| कपिलवस्तु (सिद्धार्थनगर, पिपरहवा) | शाक्य क्षेत्र; बुद्ध-अवशेषों की प्राप्ति |
| संकिसा (फर्रुखाबाद) | बुद्ध के स्वर्ग से अवतरण की परंपरा |
| कौशाम्बी | बुद्ध का प्रवास; अशोक का स्तंभ (अब प्रयागराज किले में) |
| जैन तीर्थ | अयोध्या (ऋषभदेव, अजितनाथ आदि की परंपरा), हस्तिनापुर, मथुरा (कंकाली टीला) |