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उत्तर प्रदेश का गठन एवं आधुनिक इतिहास

ब्रिटिश काल में क्षेत्र का प्रशासनिक विकास (सीडेड एंड कॉन्क्वर्ड प्रोविंसेज़ से संयुक्त प्रांत 1902 तक), उत्तर प्रदेश नामकरण (24 जनवरी 1950), रियासतों का विलय, उच्च न्यायालय, प्रथम राज्यपाल व मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्रियों की सूची, उत्तराखंड का पृथक्करण (2000), मंडल-जिले, नाम परिवर्तन (प्रयागराज, अयोध्या) और जनसंख्या-आँकड़े।

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Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 4 min read

समय-संवेदी विषय। पदधारकों (राज्यपाल, मुख्यमंत्री आदि) के नाम बदलते रहते हैं। यहाँ नाम अक्टूबर 2026 तक की जानकारी पर आधारित हैं — परीक्षा से पहले अद्यतन करें। ऐतिहासिक तिथियाँ स्थिर हैं।

ब्रिटिश काल में प्रशासनिक विकास

वर्ष घटना
1801–1803 अवध से नवाब द्वारा इलाहाबाद-रुहेलखंड-गोरखपुर आदि क्षेत्र सौंपे गए (1801) तथा सिंधिया से आगरा-दिल्ली क्षेत्र जीते गए (1803) — ये "सीडेड एंड कॉन्क्वर्ड प्रोविंसेज़" कहलाए
1833 चार्टर एक्ट के तहत आगरा प्रेसीडेंसी की व्यवस्था प्रस्तावित हुई
1836 उत्तर-पश्चिमी प्रांत (North-Western Provinces) का गठन; लेफ्टिनेंट गवर्नर की नियुक्ति; राजधानी आगरा
1856 अवध का अंग्रेज़ी राज्य में विलय (वाजिद अली शाह को हटाकर)
1858 1857 के बाद ब्रिटिश ताज का शासन
1866 / 1869 उत्तर-पश्चिमी प्रांतों के उच्च न्यायालय की स्थापना (आगरा, 1866); 1869 में इलाहाबाद स्थानांतरित
1877 उत्तर-पश्चिमी प्रांत और अवध का एक ही लेफ्टिनेंट गवर्नर के अधीन संयुक्त प्रशासन
1902 "संयुक्त प्रांत आगरा और अवध" (United Provinces of Agra and Oudh) नाम अपनाया गया
1921 संयुक्त प्रांत को गवर्नर के प्रांत का दर्जा (मांटेग्यू–चेम्सफोर्ड सुधार, 1919 के बाद); सर हरकोर्ट बटलर पहले गवर्नर; राजधानी लखनऊ
1935 / 1937 भारत शासन अधिनियम 1935; 1937 के चुनाव — कांग्रेस ने मंत्रिमंडल बनाया
1937 गोविंद वल्लभ पंत संयुक्त प्रांत के प्रधानमंत्री (Premier) बने

स्वतंत्रता के बाद गठन

  • स्वतंत्रता (1947) के समय भी राज्य का नाम संयुक्त प्रांत था।
  • 24 जनवरी 1950 — संयुक्त प्रांत का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश किया गया (संविधान लागू होने से दो दिन पूर्व)।
  • रियासतों का विलय: टिहरी गढ़वाल, रामपुर और बनारस रियासतें 1949 में संयुक्त प्रांत में मिलीं।
  • राजधानी: लखनऊ।
  • उच्च न्यायालय: इलाहाबाद (प्रयागराज) में मुख्य पीठ; लखनऊ खंडपीठ 1948 में।

राज्य के प्रथम पदधारक

पद नाम
प्रथम राज्यपाल सरोजिनी नायडू (1947–49)
प्रथम मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत (1950–54; इससे पूर्व प्रधानमंत्री/Premier)
पहली महिला राज्यपाल / मुख्यमंत्री सरोजिनी नायडू (राज्यपाल); सुचेता कृपलानी (1963–67), जो भारत के किसी राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं
पहली दलित महिला मुख्यमंत्री मायावती (पहली बार 1995)

प्रमुख मुख्यमंत्री (क्रम सहित संक्षिप्त)

गोविंद वल्लभ पंत → संपूर्णानंद (1954–60) → चंद्र भानु गुप्त → सुचेता कृपलानी → चरण सिंह (1967, 1970) → हेमवती नंदन बहुगुणा → नारायण दत्त तिवारी → विश्वनाथ प्रताप सिंह → मुलायम सिंह यादव → कल्याण सिंह → मायावती → राजनाथ सिंह → अखिलेश यादव (2012–17) → योगी आदित्यनाथ (19 मार्च 2017 से; 2022 के चुनाव के बाद पुनः शपथ)।

क्रम और कार्यकाल पुस्तकों में भिन्न हो सकते हैं (राष्ट्रपति शासन और बीच-बीच के कार्यकाल)। केवल उन्हीं नामों पर भरोसा करें जो आपकी पुस्तक के अनुसार हों।

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