Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 4 min read
ध्यान दें। अधिनियम की सटीक तिथियाँ, सेवाओं की संख्या और दंड-राशि समय-समय पर संशोधित/अधिसूचित होती हैं। यहाँ अधिनियम का ढाँचा और प्रचलित तथ्य हैं; अद्यतन सेवा-सूची और नियम राज्य सरकार की अधिसूचना से देखें।
सेवा का अधिकार — अवधारणा
- नागरिकों को सरकारी सेवाएँ निश्चित समय-सीमा में पाने का कानूनी अधिकार; समय पर न मिलने पर अधिकारी पर दंड।
- उद्देश्य: पारदर्शिता, जवाबदेही, भ्रष्टाचार में कमी, "सुशासन"।
- भारत में विकास: मध्य प्रदेश (2010) में लोक सेवा गारंटी अधिनियम पहला; इसके बाद बिहार (2011), राजस्थान (2011), दिल्ली, हिमाचल, उत्तराखंड आदि।
राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2011
परिचय
- राजस्थान सरकार द्वारा 2011 में लाया गया; राज्य में अधिसूचित सेवाओं को निश्चित समय-सीमा में देने की गारंटी।
- सार्वजनिक सेवाओं में — प्रमाणपत्र (जाति, आय, निवास), जन्म-मृत्यु पंजीकरण, भूमि अभिलेख की प्रतियाँ, पेंशन, राशन कार्ड, बिजली-पानी कनेक्शन आदि।
- उद्देश्य: नागरिकों को सेवाओं की समयबद्ध डिलीवरी।
प्रमुख प्रावधान
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अधिसूचित सेवाएँ | राज्य सरकार विभिन्न विभागों की सेवाओं को अधिसूचित करती है; समय-सीमा तय |
| पदनामित अधिकारी (Designated Officer) | प्रत्येक सेवा के लिए नामित अधिकारी — आवेदन प्राप्त करना, समय पर सेवा देना |
| आवेदन की प्राप्ति | पावती (रसीद) अनिवार्य; ऑनलाइन/ई-मित्र/कार्यालय |
| समय-सीमा | सेवा के अनुसार निर्धारित (कुछ दिन से कुछ सप्ताह) |
| सेवा न देने पर | लिखित कारण बताना; आवेदक अपील कर सकता है |
| प्रथम अपील | प्रथम अपीलीय अधिकारी को |
| द्वितीय अपील | द्वितीय अपीलीय अधिकारी को |
| दंड | पदनामित अधिकारी पर आर्थिक दंड (सामान्यतः ₹500 से ₹5,000 तक — प्रचलित; अधिसूचना देखें) |
| क्षतिपूर्ति | आवेदक को (कुछ मामलों में) |
| अनुशासनात्मक कार्रवाई | बार-बार चूक पर |
| सतर्कता | अपीलीय अधिकारी द्वारा समीक्षा |
अपील प्रक्रिया (सार)
- आवेदन → पदनामित अधिकारी।
- नहीं मिलने/देर होने पर → प्रथम अपीलीय अधिकारी (निर्धारित दिनों में)।
- असंतुष्ट → द्वितीय अपीलीय अधिकारी।
- दंड → पदनामित अधिकारी पर (यदि कारण अनुचित)।