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राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारन्टी अधिनियम, 2011

सेवा के अधिकार (Right to Services) की अवधारणा और भारत में विकास; राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम 2011 के उद्देश्य, पदनामित अधिकारी, अपीलीय व्यवस्था, समय-सीमा, दंड-पुरस्कार, ई-मित्र, राज सम्पर्क पोर्टल; संबंधित कानून (राजस्थान लोक सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012, सिटीजन चार्टर, RTI); प्रभाव और परीक्षा-उपयोगी तथ्य।

📑 Contents (6 sections)

Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 4 min read

ध्यान दें। अधिनियम की सटीक तिथियाँ, सेवाओं की संख्या और दंड-राशि समय-समय पर संशोधित/अधिसूचित होती हैं। यहाँ अधिनियम का ढाँचा और प्रचलित तथ्य हैं; अद्यतन सेवा-सूची और नियम राज्य सरकार की अधिसूचना से देखें।

सेवा का अधिकार — अवधारणा

  • नागरिकों को सरकारी सेवाएँ निश्चित समय-सीमा में पाने का कानूनी अधिकार; समय पर न मिलने पर अधिकारी पर दंड।
  • उद्देश्य: पारदर्शिता, जवाबदेही, भ्रष्टाचार में कमी, "सुशासन"।
  • भारत में विकास: मध्य प्रदेश (2010) में लोक सेवा गारंटी अधिनियम पहला; इसके बाद बिहार (2011), राजस्थान (2011), दिल्ली, हिमाचल, उत्तराखंड आदि।

राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2011

परिचय

  • राजस्थान सरकार द्वारा 2011 में लाया गया; राज्य में अधिसूचित सेवाओं को निश्चित समय-सीमा में देने की गारंटी।
  • सार्वजनिक सेवाओं में — प्रमाणपत्र (जाति, आय, निवास), जन्म-मृत्यु पंजीकरण, भूमि अभिलेख की प्रतियाँ, पेंशन, राशन कार्ड, बिजली-पानी कनेक्शन आदि।
  • उद्देश्य: नागरिकों को सेवाओं की समयबद्ध डिलीवरी।

प्रमुख प्रावधान

बिंदु विवरण
अधिसूचित सेवाएँ राज्य सरकार विभिन्न विभागों की सेवाओं को अधिसूचित करती है; समय-सीमा तय
पदनामित अधिकारी (Designated Officer) प्रत्येक सेवा के लिए नामित अधिकारी — आवेदन प्राप्त करना, समय पर सेवा देना
आवेदन की प्राप्ति पावती (रसीद) अनिवार्य; ऑनलाइन/ई-मित्र/कार्यालय
समय-सीमा सेवा के अनुसार निर्धारित (कुछ दिन से कुछ सप्ताह)
सेवा न देने पर लिखित कारण बताना; आवेदक अपील कर सकता है
प्रथम अपील प्रथम अपीलीय अधिकारी को
द्वितीय अपील द्वितीय अपीलीय अधिकारी को
दंड पदनामित अधिकारी पर आर्थिक दंड (सामान्यतः ₹500 से ₹5,000 तक — प्रचलित; अधिसूचना देखें)
क्षतिपूर्ति आवेदक को (कुछ मामलों में)
अनुशासनात्मक कार्रवाई बार-बार चूक पर
सतर्कता अपीलीय अधिकारी द्वारा समीक्षा

अपील प्रक्रिया (सार)

  1. आवेदन → पदनामित अधिकारी।
  2. नहीं मिलने/देर होने पर → प्रथम अपीलीय अधिकारी (निर्धारित दिनों में)।
  3. असंतुष्ट → द्वितीय अपीलीय अधिकारी।
  4. दंड → पदनामित अधिकारी पर (यदि कारण अनुचित)।

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