← राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थानी संस्कृति, परंपरा एवं विरासत

राजस्थान की सामाजिक संरचना (जातियाँ, जनजातियाँ — मीणा, भील, गरासिया, सहरिया, कंजर, सांसी), संस्कार और रीति-रिवाज (जन्म, विवाह, मृत्यु), प्रथाएँ (सती, जौहर, पर्दा, दहेज, नाता, आट्टा-साट्टा, मौताणा), खान-पान, पहनावा, अतिथि सत्कार, राजस्थान की जनजातियों की विशेषताएँ, UNESCO की सांस्कृतिक विरासत और संरक्षण पर नियम-कानून।

📑 Contents (8 sections)

Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read

ध्यान दें। प्रथाओं के वर्णन ऐतिहासिक और सामाजिक अध्ययन के रूप में हैं। जनजातियों के आँकड़े जनगणना 2011 पर आधारित हैं और बदल सकते हैं।

राजस्थानी समाज की रूपरेखा

  • राजस्थानी समाज जाति-आधारित, संयुक्त परिवार और कृषि-पशुपालन पर आधारित रहा है।
  • प्रमुख वर्ग: राजपूत, ब्राह्मण, महाजन (वणिक — ओसवाल, अग्रवाल, माहेश्वरी), जाट, गुर्जर, मीणा, रेबारी/राईका, माली, कुम्हार, चारण-भाट, मुस्लिम (मेव, कायमखानी, सिंधी मुसलमान) आदि।
  • संस्कृति के चार प्रमुख क्षेत्र: मारवाड़, मेवाड़, हाड़ौती-ढूँढाड़, मेवात-ब्रज।
  • मूल्य: अतिथि देवो भव (पधारो म्हारे देस), वचन-पालन, शौर्य, पशु-पर्यावरण से जुड़ाव।

संस्कार और रीति-रिवाज

जन्म और बाल्यकाल

  • जन्म पर थाली बजाना, जच्चा गीत, पोमचा/ पीला ओढ़ाना; नामकरण, मुंडन (जडूला), अन्नप्राशन।
  • पोमचा — नवजात के जन्म पर ननिहाल से भेजी जाने वाली पीले रंग की ओढ़नी (पुत्र जन्म पर)।

विवाह

  • प्रमुख रस्में: सगाई, तिलक, बिनौरी, हल्दी, मेहँदी, बंदोली, तोरण (दूल्हा तोरण मारता है), फेरे, कन्यादान, बारात विदाई, मुँह दिखाई।
  • गणगौर पूजा — नवविवाहिताओं के लिए विशेष।
  • सामूहिक विवाह, अक्षय तृतीया (आखा तीज) — बाल विवाह की कुरीति की चर्चा; कानून बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 और राजस्थान सरकार द्वारा अभियान।
  • पहरावणी, दहेज/दायजा — कुछ क्षेत्रों में।

मृत्यु

  • दाह संस्कार, अस्थि विसर्जन, तीया (तीसरा), बारहवाँ/तेरहवीं, मृत्युभोज — कुप्रथा के रूप में राजस्थान मृत्युभोज निषेध अधिनियम, 1960।
  • छतरियाँ/थड़ा — शासकों/सम्मानित जनों की स्मृति में।

प्रमुख सामाजिक प्रथाएँ

प्रथा विवरण कानून/स्थिति
सती प्रथा पति की चिता पर पत्नी का दहन 1829 में विलियम बैंटिक ने बंगाल में प्रतिबंध; राजस्थान में 1987 की रूप कँवर (दिवराला, सीकर) घटना के बाद राजस्थान सती निवारण अधिनियम, 1987 और केंद्रीय सती (निवारण) अधिनियम, 1987
जौहर/साका युद्ध में पराजय पर स्त्रियों का अग्नि-प्रवेश (जौहर) और पुरुषों का केसरिया (साका) ऐतिहासिक (चित्तौड़, रणथंभौर, जैसलमेर आदि)
पर्दा प्रथा (घूँघट) स्त्रियों का मुख ढकना शिक्षा से कमी
बाल विवाह अल्प आयु में विवाह बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006; सारदा अधिनियम 1929
दहेज विवाह में उपहार की माँग दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961
नाता प्रथा विधवा/विवाहिता का दूसरे पुरुष के साथ रहना (कुछ जातियों में) सामाजिक रूप से स्वीकार्य; बाल-अधिकार चिंता
आट्टा-साट्टा लड़की के बदले लड़की से विवाह कुछ समुदायों में
मौताणा भील क्षेत्र में हत्या-दुर्घटना पर मृतक के परिजनों को मुआवजा/ दंड की माँग कानून और प्रशासन से नियमन
डाकन प्रथा स्त्रियों को डायन बताकर प्रताड़ित करना राजस्थान डायन प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2015

(कुछ प्रथाओं के नियम-वर्ष पुस्तकों में भिन्न मिलते हैं।)

सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन (सार)

  • आर्य समाज (दयानंद सरस्वती) — उदयपुर, जोधपुर में प्रभाव; सत्यार्थ प्रकाश का भाग उदयपुर में लिखा गया।
  • बाल-विवाह, सती, दहेज आदि के विरुद्ध राजस्थान सेवा संघ, सेवा समितियाँ।
  • शिक्षा और महिला जागरूकता — हरिभाऊ उपाध्याय, जमनालाल बजाज, वनस्थली विद्यापीठ (टोंक) — हीरालाल शास्त्री द्वारा।

राजस्थान की जनजातियाँ

(जनगणना 2011: अनुसूचित जनजाति राजस्थान की जनसंख्या का लगभग 13.5 %।)

जनजाति क्षेत्र विशेषता
मीणा जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, अलवर, करौली, उदयपुर राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति; कृषक, चौकीदार; जरायम पेशा कानून का विरोध; मीणा पुराण
भील बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, सिरोही दूसरी सबसे बड़ी; तीर-कमान; घर — "कू", बस्ती — "फला", गाँव मुखिया — "गमेती"; गवरी नृत्य; "महुआ"
गरासिया सिरोही, उदयपुर, पाली (आबू) "सोहरी" (अनाज भंडार), भील-राजपूत मिश्रित माने जाते हैं; मोर बंधिया विवाह; "गौर" मेला
सहरिया बारां (शाहबाद, किशनगंज) सबसे पिछड़ी (PVTG — विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह); "सहरिया स्वांग" (नृत्य); "मकान — टापरी"; सहरिया विकास कार्यक्रम
डामोर डूंगरपुर, बाँसवाड़ा गुजरात-सीमा
कथौड़ी उदयपुर (कोटड़ा, झाड़ोल) कत्था बनाने वाले; महाराष्ट्र से आए; PVTG
कंजर बारां, कोटा, झालावाड़, भीलवाड़ा, उदयपुर चकरी नृत्य; घुमंतू
सांसी भरतपुर घुमंतू
भील-मीणा मेवाड़ मिश्रित

(PVTG — विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह: सहरिया, कथौड़ी।)

खान-पान

  • दाल-बाटी-चूरमा — राजस्थान का प्रतिनिधि भोजन; मेवाड़ में प्रसिद्ध।
  • गट्टे की सब्जी, केर-सांगरी, कढ़ी, बाजरे की रोटी, मक्के की रोटी; कचौरी (जोधपुर की मावा कचौरी, कोटा की प्याज कचौरी)।
  • मिठाइयाँ: घेवर (जयपुर, तीज), मावा कचौरी, मिर्ची बड़ा, बीकानेरी भुजिया और रसगुल्ला, पेठा (अलवर का "कलाकंद"), सोहन हलवा (अजमेर), मालपुआ (पुष्कर), दिलखुश (नाथद्वारा)।
  • पेय: छाछ, लस्सी, सत्तू, कांजी।

UNESCO और संरक्षित विरासत

  • विश्व धरोहर स्थल: जंतर-मंतर (जयपुर, 2010), राजस्थान के पहाड़ी किले (2013), जयपुर शहर (2019), केवलादेव (भरतपुर, 1985)।
  • अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर: कालबेलिया नृत्य (2010); (अन्य सूची परिवर्तनशील)।
  • राजस्थान पर्यटन विभाग, राष्ट्रीय/राज्य संग्रहालय — अल्बर्ट हॉल (जयपुर, 1887)।
  • हेरिटेज होटल और लोक कला संरक्षण — भारतीय लोक कला मंडल (उदयपुर), जवाहर कला केंद्र (जयपुर), रूपायन संस्थान (बोरुंदा, जोधपुर — कोमल कोठारी)।

परीक्षा-उपयोगी तथ्य

  • सबसे बड़ी जनजाति — मीणा; दूसरी — भील; PVTG — सहरिया, कथौड़ी।
  • सती निवारण अधिनियम — 1987 (रूप कँवर कांड, दिवराला)।
  • मृत्युभोज निषेध — 1960; डायन प्रताड़ना निवारण — 2015।
  • दाल-बाटी-चूरमा — राजस्थानी भोजन; घेवर — तीज।
  • अल्बर्ट हॉल — जयपुर संग्रहालय (1887)।
Common Mistakeआम गलतियाँ
  • सहरिया जनजाति को सबसे बड़ी बताना (यह सबसे पिछड़ी/PVTG है)।
  • सती प्रथा निषेध को राजस्थान में 1829 का मानना (1829 बंगाल का कानून है; राजस्थान का 1987)।
  • भील और मीणा को एक जनजाति मानना।
Revision Summaryसारांश
  1. राजस्थानी संस्कृति संयुक्त परिवार, अतिथि-सत्कार और शौर्य की परंपरा पर आधारित है; संस्कारों में विवाह और गणगौर प्रमुख हैं।
  2. सती, बाल विवाह, दहेज, डायन प्रताड़ना जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध कानून बने हैं।
  3. मीणा सबसे बड़ी, भील दूसरी बड़ी जनजाति है; सहरिया और कथौड़ी PVTG हैं।
  4. दाल-बाटी-चूरमा और घेवर प्रसिद्ध व्यंजन हैं; जंतर-मंतर, किले और जयपुर शहर UNESCO धरोहर हैं।

This chapter is in the syllabus of

Open an exam to see where this chapter sits in its syllabus, and to practise it.