| माखनलाल चतुर्वेदी (1889–1968) |
बाबई (अब माखननगर), नर्मदापुरम (होशंगाबाद); कर्मक्षेत्र खंडवा |
"एक भारतीय आत्मा"; पुष्प की अभिलाषा, हिमकिरीटिनी, हिमतरंगिनी (साहित्य अकादमी 1955), कर्मवीर पत्र का संपादन; पद्मभूषण (1963) |
| सुभद्राकुमारी चौहान (1904–1948) |
निहालपुर (प्रयागराज) में जन्म; जबलपुर कर्मक्षेत्र |
"झाँसी की रानी", मुकुल, त्रिधारा; स्वतंत्रता सेनानी |
| भवानी प्रसाद मिश्र (1913–1985) |
टिगरिया (नरसिंहपुर/होशंगाबाद) |
गीतफरोश, बुनी हुई रस्सी (साहित्य अकादमी 1972), चकित है दुख; दूसरा सप्तक के कवि |
| गजानन माधव मुक्तिबोध (1917–1964) |
श्योपुर / ग्वालियर क्षेत्र (जन्म श्योपुर); कर्मक्षेत्र उज्जैन, राजनांदगाँव |
चाँद का मुँह टेढ़ा है, अँधेरे में (लंबी कविता); तार सप्तक के कवि; नई कविता |
| हरिशंकर परसाई (1922–1995) |
जमानी (होशंगाबाद); कर्मक्षेत्र जबलपुर |
व्यंग्य: विकलांग श्रद्धा का दौर (साहित्य अकादमी 1982), ठिठुरता हुआ गणतंत्र, भोलाराम का जीव, वैष्णव की फिसलन; "हिंदी व्यंग्य के भीष्म पितामह" |
| शरद जोशी (1931–1991) |
उज्जैन |
व्यंग्य: जीप पर सवार इल्लियाँ, प्रतिदिन; पद्मश्री (1990) |
| शिवमंगल सिंह 'सुमन' (1915–2002) |
उन्नाव में जन्म; उज्जैन विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति |
हिल्लोल, मिट्टी की बारात (साहित्य अकादमी 1974); पद्मभूषण |
| दुष्यंत कुमार (1931–1975) |
राजपुर नवादा (बिजनौर), कर्मक्षेत्र भोपाल |
साये में धूप (हिंदी ग़ज़ल); एक कंठ विषपायी |
| नरेश मेहता (1922–2000) |
शाजापुर |
संशय की एक रात; ज्ञानपीठ पुरस्कार (1992) |
| वृंदावनलाल वर्मा (1889–1969) |
झाँसी (उ.प्र.), बुंदेलखंड |
मृगनयनी, झाँसी की रानी, विराटा की पद्मिनी (ऐतिहासिक उपन्यास) |
| रामकुमार वर्मा |
सागर |
एकांकी नाटक के जनक (प्रचलित) |
| प्रभाकर माचवे |
ग्वालियर / इंदौर |
कवि-आलोचक |
| अशोक वाजपेयी |
दुर्ग (छ.ग.) में जन्म; कर्मक्षेत्र भोपाल |
कविता, संस्कृति-प्रशासन (भारत भवन) |
| शरद पगारे |
उज्जैन |
ऐतिहासिक उपन्यास |
| बाल कवि बैरागी |
नीमच (मनासा) |
लोकप्रिय कवि-नेता |