Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read
ध्यान दें। लोक कलाओं के नाम और क्षेत्र परंपरा पर आधारित हैं; पुस्तकों में हल्की भिन्नता मिलती है। यहाँ परीक्षा-प्रचलित तथ्य हैं।
क्षेत्रवार लोक संगीत
| क्षेत्र | विधाएँ |
|---|---|
| बुंदेलखंड | आल्हा (वीर रस), फाग, कजरी, दिवारी, राई के गीत, सखियाँ, बधाई, लेद (लोकगाथा) |
| बघेलखंड | बघेली लोकगीत, कजरी, सोहर, बिरहा, दादरा |
| मालवा | माच (लोकनाट्य), निर्गुणी (कबीर) भजन, संजा के गीत, गरबा/हींड, मटकी गीत |
| निमाड़ | गणगौर के गीत (प्रसिद्ध), फाग, नाग पंचमी, वारी गीत |
| ग्वालियर-चंबल | ख्याल, ध्रुपद-धमार, भदावरी लोकगीत, स्वांग |
| आदिवासी अंचल | गोंडी-भीली-बैगा गीत; ढोल-मांदल के साथ |
- आल्हा गायन — जगनिक के आल्हखंड से; आल्हा-ऊदल की वीरगाथा; बुंदेलखंड में वर्षा ऋतु में।
- कबीर भजन (निर्गुणी) — मालवा-निमाड़; प्रह्लाद सिंह टिपानिया (पद्मश्री) प्रसिद्ध गायक।
लोक नृत्य
| नृत्य | क्षेत्र / समुदाय | विशेषता |
|---|---|---|
| राई | बुंदेलखंड (सागर, झाँसी-सीमा) — बेड़नी समुदाय की नर्तकियाँ | ढोलक/मृदंग, नगड़िया पर; रंगीन घाघरे, घुँघरू; पद्मश्री रामसहाय पांडे राई के प्रसिद्ध कलाकार हैं |
| कर्मा | गोंड, बैगा, उराँव (मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, शहडोल) | करम वृक्ष की पूजा से जुड़ा; सामूहिक नृत्य |
| सैला (शैला) | गोंड (छत्तीसगढ़-मंडला) | डंडा नृत्य; दशहरा के बाद |
| सुआ | गोंड महिलाएँ | तोते (सुआ) की प्रतीक मूर्ति के चारों ओर |
| भगोरिया | भील, भिलाला (झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी) | होली से पहले हाट-मेले में; मांदल, बाँसुरी, ढोल |
| गौर नृत्य | भील, गोंड (मुरिया) | गौर (बाइसन) के सींग लगाकर |
| थापटी | कोरकू (हरदा, बैतूल, खंडवा) | थाप (पैरों की गति) |
| ढांढल | कोरकू | — |
| परघौनी, बिलमा, बैगा करमा | बैगा | विवाह में बारात का स्वागत (परघौनी) |
| सहरिया स्वांग | सहरिया (श्योपुर, शिवपुरी) | होली के बाद, पुरुष स्त्री वेश में |
| मटकी | मालवा | महिलाएँ सिर पर मटका रखकर |
| नौरता | कुँवारी कन्याएँ (मालवा-निमाड़) | नवरात्रि में |
| लहंगी, बरेदी | बुंदेलखंड | यादव/अहीर समुदाय |
| दादरा, ख्याल (गायन-नृत्य) | ग्वालियर-चंबल | — |