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मध्यप्रदेश की कला, स्थापत्य एवं मूर्तिकला

मध्यप्रदेश की प्रागैतिहासिक कला (भीमबेटका, आदमगढ़), बौद्ध स्थापत्य (सांची), गुप्तकालीन कला (उदयगिरि, एरण), परमार स्थापत्य (भोजपुर, उज्जैन, धार, माँडू), चंदेल स्थापत्य (खजुराहो), कल्चुरी, ग्वालियर-ओरछा-दतिया के महल-किले, इस्लामी स्थापत्य (माँडू, चंदेरी, बुरहानपुर, ताज-उल-मसाजिद), मराठाकालीन महेश्वर-इंदौर, चित्रकला और मूर्तिकला; UNESCO धरोहर और परीक्षा-उपयोगी तथ्य।

📑 Contents (11 sections)

Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read

ध्यान दें। निर्माणकाल और निर्माताओं के नाम स्रोतों में कुछ भिन्न मिलते हैं; यहाँ परीक्षा में स्वीकृत तथ्य दिए गए हैं।

प्रागैतिहासिक कला

स्थल जिला विशेषता
भीमबेटका रायसेन (भोपाल के निकट) शैलाश्रय (गुफा-चित्र) — पुरापाषाण से मध्य युग तक के चित्र; 1957 में डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर ने खोज की; UNESCO विश्व धरोहर (2003); शिकार, नृत्य, पशु, युद्ध के दृश्य; लाल, सफेद, पीले रंग
आदमगढ़ की पहाड़ियाँ नर्मदापुरम (होशंगाबाद) शैल चित्र; पशुपालन के प्रारंभिक प्रमाण (प्रचलित)
पचमढ़ी (जंबूद्वीप, महादेव पहाड़ियाँ) नर्मदापुरम शैलचित्र
रायसेन, सागर, छतरपुर, सीहोर — शैलचित्र-स्थल

बौद्ध कला

  • सांची (रायसेन) — UNESCO विश्व धरोहर (1989)।
    • महास्तूप (स्तूप संख्या 1): अशोक (मौर्य) द्वारा आरंभ, शुंगों द्वारा विस्तार; चार तोरण द्वार (सातवाहन काल) — जातक कथाएँ, बुद्ध के प्रतीक (चक्र, बोधिवृक्ष, स्तूप, पदचिह्न); शालभंजिका (वृक्ष-देवी) की मूर्तियाँ; बुद्ध की मानव रूप में मूर्ति नहीं (प्रतीकों से)।
    • स्तूप संख्या 2, 3 (सारिपुत्र-मौद्गल्यायन के अवशेष), गुप्तकालीन मंदिर संख्या 17, अशोक स्तंभ (सिंह-शीर्ष खंड)।
  • सतधारा, सोनारी, अंधेर, भोजपुर (विदिशा क्षेत्र) — स्तूप समूह।
  • भरहुत (सतना) — शुंगकालीन स्तूप के वेदिका-तोरण (जातक कथाएँ)।

गुप्तकालीन कला

  • उदयगिरि की गुफाएँ (विदिशा) — चंद्रगुप्त द्वितीय से जुड़ी; वराह अवतार की विशाल मूर्ति (भूदेवी को उठाए), गुप्तकालीन गुफा-मंदिर।
  • एरण (सागर) — वराह की विशाल प्रतिमा, गरुड़ स्तंभ, विष्णु मंदिर के अवशेष।
  • नचना-कुठार (पन्ना) — पार्वती मंदिर; भूमरा (सतना) — शिव मंदिर; तिगवां (कटनी/जबलपुर) — विष्णु मंदिर — गुप्तकालीन सपाट छत वाले प्रारंभिक मंदिर।

परमार स्थापत्य (मालवा)

स्मारक स्थान विशेषता
भोजेश्वर शिव मंदिर (भोजपुर) रायसेन राजा भोज द्वारा; "पूर्व का सोमनाथ"; विशाल अधूरा शिवलिंग; ऊँची जगती; अधूरी छत और विशाल रैम्प
भोजशाला धार संस्कृत शिक्षा केंद्र/सरस्वती मंदिर
उदयेश्वर (नीलकंठेश्वर) मंदिर उदयपुर (विदिशा) उदयादित्य द्वारा; नागर शैली का श्रेष्ठ उदाहरण
महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक; वर्तमान संरचना मराठा काल (18वीं सदी) की; "महाकाल लोक" (2022)
गोपाल मंदिर, हरसिद्धि, काल भैरव उज्जैन —
जंतर-मंतर (वेधशाला) उज्जैन सवाई जयसिंह द्वितीय (18वीं सदी) द्वारा — शून्य देशांतर रेखा का प्राचीन केंद्र
ग्यारसपुर — मालादेवी मंदिर, बाजरा मठ, हिंडोला तोरण विदिशा परमार-प्रतिहार कालीन

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