Last reviewed 1 Oct 2026 · Facts as of 1 Oct 2026 · 5 min read
ध्यान दें। निर्माणकाल और निर्माताओं के नाम स्रोतों में कुछ भिन्न मिलते हैं; यहाँ परीक्षा में स्वीकृत तथ्य दिए गए हैं।
प्रागैतिहासिक कला
| स्थल | जिला | विशेषता |
|---|---|---|
| भीमबेटका | रायसेन (भोपाल के निकट) | शैलाश्रय (गुफा-चित्र) — पुरापाषाण से मध्य युग तक के चित्र; 1957 में डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर ने खोज की; UNESCO विश्व धरोहर (2003); शिकार, नृत्य, पशु, युद्ध के दृश्य; लाल, सफेद, पीले रंग |
| आदमगढ़ की पहाड़ियाँ | नर्मदापुरम (होशंगाबाद) | शैल चित्र; पशुपालन के प्रारंभिक प्रमाण (प्रचलित) |
| पचमढ़ी (जंबूद्वीप, महादेव पहाड़ियाँ) | नर्मदापुरम | शैलचित्र |
| रायसेन, सागर, छतरपुर, सीहोर | — | शैलचित्र-स्थल |
बौद्ध कला
- सांची (रायसेन) — UNESCO विश्व धरोहर (1989)।
- महास्तूप (स्तूप संख्या 1): अशोक (मौर्य) द्वारा आरंभ, शुंगों द्वारा विस्तार; चार तोरण द्वार (सातवाहन काल) — जातक कथाएँ, बुद्ध के प्रतीक (चक्र, बोधिवृक्ष, स्तूप, पदचिह्न); शालभंजिका (वृक्ष-देवी) की मूर्तियाँ; बुद्ध की मानव रूप में मूर्ति नहीं (प्रतीकों से)।
- स्तूप संख्या 2, 3 (सारिपुत्र-मौद्गल्यायन के अवशेष), गुप्तकालीन मंदिर संख्या 17, अशोक स्तंभ (सिंह-शीर्ष खंड)।
- सतधारा, सोनारी, अंधेर, भोजपुर (विदिशा क्षेत्र) — स्तूप समूह।
- भरहुत (सतना) — शुंगकालीन स्तूप के वेदिका-तोरण (जातक कथाएँ)।
गुप्तकालीन कला
- उदयगिरि की गुफाएँ (विदिशा) — चंद्रगुप्त द्वितीय से जुड़ी; वराह अवतार की विशाल मूर्ति (भूदेवी को उठाए), गुप्तकालीन गुफा-मंदिर।
- एरण (सागर) — वराह की विशाल प्रतिमा, गरुड़ स्तंभ, विष्णु मंदिर के अवशेष।
- नचना-कुठार (पन्ना) — पार्वती मंदिर; भूमरा (सतना) — शिव मंदिर; तिगवां (कटनी/जबलपुर) — विष्णु मंदिर — गुप्तकालीन सपाट छत वाले प्रारंभिक मंदिर।
परमार स्थापत्य (मालवा)
| स्मारक | स्थान | विशेषता |
|---|---|---|
| भोजेश्वर शिव मंदिर (भोजपुर) | रायसेन | राजा भोज द्वारा; "पूर्व का सोमनाथ"; विशाल अधूरा शिवलिंग; ऊँची जगती; अधूरी छत और विशाल रैम्प |
| भोजशाला | धार | संस्कृत शिक्षा केंद्र/सरस्वती मंदिर |
| उदयेश्वर (नीलकंठेश्वर) मंदिर | उदयपुर (विदिशा) | उदयादित्य द्वारा; नागर शैली का श्रेष्ठ उदाहरण |
| महाकालेश्वर मंदिर | उज्जैन | 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक; वर्तमान संरचना मराठा काल (18वीं सदी) की; "महाकाल लोक" (2022) |
| गोपाल मंदिर, हरसिद्धि, काल भैरव | उज्जैन | — |
| जंतर-मंतर (वेधशाला) | उज्जैन | सवाई जयसिंह द्वितीय (18वीं सदी) द्वारा — शून्य देशांतर रेखा का प्राचीन केंद्र |
| ग्यारसपुर — मालादेवी मंदिर, बाजरा मठ, हिंडोला तोरण | विदिशा | परमार-प्रतिहार कालीन |